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कुत्ते की मौत के बाद भी नही चेता रुपारेल बिल्डर अगर कांदिवली पुलिस ने की होती कार्रवाई तो नही जाती मासूम की जान।

मुंबई (सं.भा. सं .)।  कहते है कि अगर व्यक्ति समय पर चेत जाए तो वह अपने साथ ही दूसरों के लिए भी फायदा करता है। कांदिवली पश्चिम के गणेश नगर में रुपारेल बिल्डर द्वारा एसआरए का काम किया जा रहा है। अपने धन बल के मद में चूर इस बिल्डर द्वारा बरती गई अनियमितताओं के कारण जानवर से लेकर मनुष्य तक की जान जा रही है। बिल्डर के आर्थीक दबाव में पूरी तरह दब चुकी कांदिवली पुलिस अगर बिल्डर के एसआरए की साईट पर करंट लगने से कुत्ते की हुई मौत के बाद उचित कार्रवाई करती और बिल्डर समय रहते चेत जाता तो ७ वर्षीय मासूम आदित्य चौहान आज जिंदा होता और अपने माता – पिता के पास हंसता – खेलता रहता।

गौरतलब है कि रुपारेल बिल्डर द्वारा गणेश नगर में बड़े पैमाने पर एसआरए स्कीम के तहत काम किया जा रहा है। इस में काफी झोपड़ाधारक अभी भी अपने पात्रता को लेकर दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। जिन सोसाइटी के पदाधिकारी इन झोपड़ा धारकों के दम पर नेतागिरी करते दिखते थे आज वही लोग रुपारेल बिल्डर के पक्षधर बने हैं। सोसायटी के पदाधिकारियों, एसआरए के इंजीनियरों, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारियों के अलावा कांदिवली पुलिस के परोक्ष या अपरोक्ष रुप से साथ मिलने के कारण रुपारेल बिल्डर की दबंगई अपनी चरम सीमा पर है। बिल्डिंग बनाने के लिए खोदे गए गड्ढे को पतरे से पूरी तरह घेर कर सुरक्षित न करना, वहां किसी सुरक्षा रक्षक  को उपलब्ध न कराना यह यही दर्शाता है। बिजली के कटे फटे वायर जमीन पर छोड़ देना रुपारेल बिल्डर के पालरवाही का मिशाल पेश करते हैं। यही कारण है कि २९ मार्च को खुले बिजली के वायर से करंट लगने के कारण एक कुत्ते की मौत हो गई थी। उस दौरान भी यहां के रहिवासियों ने बिल्डर के लापरवाही को लेकर विरोध जताया था। पर बिल्डर तो ठहरा बिल्डर अपने रसुख और पैसे के दम पर कांदिवली पुलिस को कर्तव्यनिष्ठा से ही वंचित कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कांदिवली पुलिस ने कुत्ते की मौत के बाद उचित और ठोस कदम उठाती तो आज आदित्य नामक मासूम को करंट नही लगता और खोदे गए गड्ढे की पानी में डूब कर नही मरता। गणेश नगर में जहां पर रुपारेल बिल्डर एसआरए के तहत बिल्डिंग का काम कर रहा है वहां का निरीक्षण करने पर पाया गया कि उक्त स्थान पर झोपड़ा होने के बावजूद उसने बड़े – बड़े गड्ढे खोद दिए हैं जिस के कारण कभी भी कोई अन्य बड़ा हादसा हो सकता है। स्किम के तहत पहले बिल्डर को एसआरए का बिल्डिंग बनाना अनिवार्य है। बनाए गए बिल्डिंग में झोपड़ाधारकों को स्थानांतरित करवाने के बाद ही वह सेल का बिल्डिंग बना सकता है। रुपारेल बिल्डर पर एसआरए का यह कानून शायद लागू नही होता है। उसने एसआरए के साथ ही सेल की बिल्डिंग बनाना भी शुरु कर दिया है। उसके इस कारनामों से एसआरए के इंजीनियरों ने भी अपने आंखे मुंद रखी हैं।

७ वर्षीय आदित्य चौहान की रुपारेल बिल्डर की लापरवाही से हुई मौत के बाद कांदिवली पुलिस ने उस पर और उसके पार्टनरों के खिलाफ भा. द. वि.  की धारा ३०४ (अ) और ३४ के तहत मामला दर्ज किया है। घटना घटने के ६ दिन बाद भी कांदिवली पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बावजूद बिल्डर और उसके पार्टनरों के खिलाफ कोई कार्रवाई करती दिखाई नही दे रही है। स्थानीय लोगों की माने तो जिस दिन मासूम आदित्य की मौत के बाद लाश पड़ी थी  उसके दूसरे दिन कांदिवली पुलिस स्टेशन के कुछ अधिकारी बिल्डर के एक करीबी सहित मनसे के एक नेता के साथ ईद की पार्टी करते नजर आए।

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