मुंबई, (सं. भा.), पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा श्री एल.आर. तिवारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मीरा रोड (पूर्व) में आयोजित साहित्य, संस्कृति और समाज के सृजन पर्व ‘पुरवाई-2026’ के दौरान जौनपुर और ज़फराबाद की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण तथा पुनर्स्थापना को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में मनहेच किला, सगरेकोट, जमैथा, मादरडीह सहित कई ऐतिहासिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त कराने, उनके संरक्षण, शोध तथा विकास की मांग केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से की गई। साथ ही जौनपुर और ज़फराबाद की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने और अटाला मस्जिद विवाद के समाधान के लिए सर्वे कराने का भी प्रस्ताव रखा गया।
यह प्रस्ताव जय शंकर तिवारी ने प्रस्तुत किया, जिसका समर्थन पूर्व सांसद संजय निरुपम और विधायक नरेंद्र मेहता ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मीरा-भायंदर की महापौर श्रीमती डिंपल मेहता ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा थे, जबकि अध्यक्षता शिक्षाविद लल्लन तिवारी ने की। कार्यक्रम के आयोजक एवं विषय प्रवर्तक वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सिंह ने सनातन धर्म और जौनपुर के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत करते हुए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
ज़फराबाद-जौनपुर प्रस्ताव
28 जून, 2026, श्री एल.आर. तिवारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मीरा रोड (पूर्व), ठाणे-401107
पूर्वांचल और देश के दूसरे प्रवास और प्रव्रजन प्रभावित इलाकों के आर्थिक-औद्योगिक व सांस्कृतिक विकास के लिए काम कर रही संस्था पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा साहित्य, संस्कृति और समाज के सृजन पर्व पुरवाई-2026 की विचार सभा यह प्रस्ताव करती है कि—


प्रस्ताव – 1
1. जौनपुर जिले के ज़फराबाद स्थित मनहेच किला और मछलीशहर स्थित सगरेकोट पुरातत्व संरक्षित क्षेत्र हैं। इन दोनों ही स्थानों का बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। मनहेच के राजा हरिश्चंद्र और सगरेकोट के नागराज आर्यक एवं नागमाता जरत्कारु से जुड़े होने के संकेत हैं। परवर्ती काल में मनहेच किले के स्थान पर बड़ा बौद्ध विश्वविद्यालय और बाद में वहां काशी विश्वेश्वर का रक्षक दुर्ग स्थापित किया गया।
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में होने के बावजूद मनहेच और सगरेकोट की भूमि पर बहुत तेजी से अतिक्रमण हुआ है। यदि यही स्थिति रही तो अगले चार-पांच वर्षों में ये दोनों स्थान पूरी तरह से विनष्ट हो जाएंगे। हम केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध करते हैं कि इन दोनों स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराकर उनकी भूमि की सुरक्षा और संरक्षण के समुचित प्रबंध किए जाएं।


मनहेच और सगरेकोट दोनों भारत के अन्तर्कोट थे। वे असनि दुर्ग थे। पश्चिमी सीमा प्रांत पर जब उत्तर से हमले होते थे, तब देश की रक्षा के लिए लड़ने वाले वज्र सैनिकों की कुमुक यहीं से रवाना होती थी। अवध से लेकर भागलपुर तक के वीर यहां इकट्ठे होते थे। सगरेकोट में संभवतः नागवंश को बचाने वाले आस्तिक मुनि का जन्म हुआ। श्वेताश्वतर उपनिषद जिनकी थाती है। हम इन दोनों स्थानों के समुचित विकास की भी मांग करते हैं।
प्रस्ताव – 2
2. जमैथा और मादरडीह दोनों इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों का नागवंश से गहरा जुड़ाव रहा है। मादरडीह का थोड़ा-सा उत्खनन हुआ है, लेकिन जमैथा अब भी अछूता पड़ा है। इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से इन दोनों स्थानों के व्यापक अध्ययन की जरूरत है।
जमैथा को केंद्र बनाकर एक बड़े नाग परिपथ की भी कल्पना की जा सकती है, जिसका विस्तार फोनेसिया तक होगा। इससे हमारी मध्यवर्ग की कई जातियों का बड़ा सामाजिक उन्नयन होगा तथा दुनिया के कई देशों के साथ हमारे सांस्कृतिक संबंधों को नई पहचान मिलेगी। हम केंद्र और राज्य सरकार से इस दिशा में ठोस पहल करने की अपील करते हैं।


प्रस्ताव – 3
3. मध्यकाल के तुगलक और शर्की सल्तनत के शासन के दौरान इन दोनों नगरों को पूरी तरह से ध्वस्त करके उन्हें नया नाम और नया रंग-रूप दे दिया गया था। वही नाम और रंग-रूप अभी भी चला आ रहा है। इन नगरों के पुराने नाम और रूप को जानकर उन्हें फिर से स्थापित करने की जरूरत है।
हम ज़फराबाद का नाम हरिश्चन्द्र पुरी या विद्या भूमि तथा जौनपुर का नाम अयुतायु नगर या ऋतुपर्ण किए जाने का सुझाव देते हैं। पुराने ज़फराबाद का जिस तरह राजा हरिश्चंद्र और दस महाविद्याओं की आराधना करने वाली रानी तारामती से जुड़ाव था, उसी तरह इक्ष्वाकु नरेश अयुतायु और राजा ऋतुपर्ण का पुराने जौनपुर से जुड़ाव था।

हम जल्द ही बख्शा, राजेपुर, सिरकोनी, मल्हनी, मड़ियाहूं, केराकत, किलकिछा आदि स्थानों की भी मूल पहचान कर राज्य सरकार को पूरी सांस्कृतिक परिधि के पुनरुत्थान का प्रस्ताव सौंपेंगे।
प्रस्ताव – 4
4. अटाला मस्जिद संबंधी विवाद भी अनावश्यक रूप से वर्षों से उलझा पड़ा है। ऐसे प्रकरणों का समय रहते समाधान नहीं होने से सामाजिक दूरी बढ़ती है और विवादित स्थान का समुचित सांस्कृतिक उपयोग भी नहीं हो पाता।
यह सभा राज्य सरकार से अटाला मस्जिद का सर्वे कराकर सत्य, न्याय और सौजन्य पर आधारित समाधान निकालने की मांग करती है। यह कार्य विशुद्ध पंचायती पहल से भी संभव हो सकता है। अलगू चौधरी और जुम्मन शेख की कहानी इसी देश में लिखी गई। राज्य सरकार चाहे तो हम ऐसी पहल के लिए आवश्यक संवाद और सकारात्मक वातावरण तैयार करने का प्रयास कर सकते हैं।

अलग से बॉक्स
- प्रस्ताव जय शंकर तिवारी ने प्रस्तुत किया। इसका समर्थन पूर्व सांसद संजय निरुपम तथा विधायक नरेंद्र मेहता ने किया।
- कार्यक्रम का शुभारंभ मीरा-भायंदर की महापौर श्रीमती डिंपल मेहता ने दीप प्रज्वलित कर किया।
- कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा थे, जबकि अध्यक्षता शिक्षाविद श्री लल्लन तिवारी ने की।
- कार्यक्रम के आयोजक एवं विषय प्रवर्तक वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सिंह ने सनातन धर्म और जौनपुर के इतिहास को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा कि स्वरोचिस मनु का मूल स्थान खीवा (उज़्बेकिस्तान), बौद्ध तारा का मूल स्थान ओश (किर्गिज़स्तान), लाल तारा का मूल स्थान तराज (कज़ाखिस्तान), हरी तारा का मूल स्थान ताजिकिस्तान, अक्षोभ्य भैरव की मूल जगह टार्टसोस-कार्डिज़ (स्पेन) तथा आदि पराशक्ति का मूल स्थान हागिया सोफिया (तुर्की) है।
- उन्होंने कहा कि ज़फराबाद और जौनपुर का इतिहास राजा हरिश्चंद्र, राजा अयुतायु और राजा ऋतुपर्ण से जुड़ा हुआ है। राजकुमारी अनंगिता के चरित्र और उत्सर्ग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राजकुमारी अनंगिता के उत्सर्ग को इतिहास में उचित स्थान दिया जाना चाहिए। ऐसे उत्सर्गों ने भारत के समाज को मजबूत किया है।


