spot_img
Homeउत्तर प्रदेशसरकारी उदासीनता से लटके विकास कार्य

सरकारी उदासीनता से लटके विकास कार्य

  • नेताओं की मिलीभगत से जिले को नहीं मिल रहा लाभ
  • फतेहपुर में जीएमडीआईसी योजना का उड़ा माखौल

फतेहपुर (प्रमोद श्रीवास्तव) । उत्तर प्रदेश में उद्योग और विकास को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार एक तरफ UPIC का आयोजन कर रही है तो दूसरी तरफ अधिकारियों की लापरवाही और नेताओं की मिलीभगत से पुरानी योजनाएं ही अमल में नहीं आ पा रही है इससे लोगों में इस बात को लेकर आशंका हो रही है की योगी के अभियान को अधिकारी जमीन पर उतार पाएंगे। गौरतलब हो की अखिलेश यादव की सरकार में सांसद रहे राकेश सचान अब योगी सरकार में मंत्री है लेकिन जिस जीएमडीआईसी योजना के तहत मौजूदा कैबिनेट मंत्री राकेश सचान (प्रभारी मंत्री) को 72 प्लाटो की सौगात दी गई थी, उस महत्वाकांक्षी योजना का जिले में कोई पुरसाहाल नहीं है, कुछ अधिकारियों की अदूरदर्शिता और कुछ राकेश सचान सरीखे लाभार्थियों ने इस योजना का मजाक बनाकर रख दिया हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उद्योग विभाग की भी इस मद में कोई रुचि नहीं रहीं। मौक़े पर अवस्थापना सुविधाएं ध्वस्त हो चुकी हैं।
उल्लेखनीय है कि लगभग चार दशक पूर्व कांग्रेस शासन काल में सूबे में मिनी औद्योगिक अस्थान (जीएमडीआईसी) योजना को अमल में लाया गया था, इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में लांच किया गया था। जनपद में 19 स्थानों पर इस योजना के तहत् भू-खण्ड चयनित हुए थे और इसके लिए मोटी रकम भी आवंटित हुईं थी, जिसके भी बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है…!
इस योजना पर जनपद के तत्कालीन सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री रहे स्व. हरिकृष्ण शास्त्री काफ़ी गंभीर थे और उन्होंने लगभग सभी स्थानों का दौरा भी किया था जिन 19 स्थानों पर इस योजना के तहत् भू आवंटन हुआ था, उनकी देख- रेख के लिए बाकायदे चौकीदारों की नियुक्ति भी हुई थीं, किन्तु प्रशासन की अदूरदर्शिता के चलते यह बड़ी योजना अपने उद्देश्य पर खरी नहीं उतर सकी! अब सबंधित प्लाट किस हाल में है इसके बारे में भी विभाग के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। कई जगहों पर तो अवैध कब्जों की भी बात कहीं जा रही है!


बताते चलें कि लगभग एक दशक पूर्व जब ज़िले के सांसद राकेश सचान थे, क्योंकि उनका ताल्लुक सत्तारूढ़ दल (समाजवादी पार्टी) से था, इसलिए उनके सारे जायज- नाजायज मामलों में किसी की भी टीका-टिप्पणी महत्वहीन होती थी। इसी दौरान इन्हीं भू खण्डो में से राकेश सचान के नाम 72 प्लाटों का आवंटन कर दिया गया, इतना ही नहीं उनसे निर्धारित न्यूनतम शुल्क भी पूर्व नहीं जमा कराया गया!
राकेश सचान 2014 में लोकसभा का चुनाव हार गए बावजूद इसके उनका सियासी प्रभुत्व स्थानीय विभागीय अधिकारियों पर बरकरार रहा! 2019 में वे कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लडे और उनका प्रचार करने दो बार प्रियंका गांधी आईं फिर भी उन्हें पचास हज़ार वोट भी नहीं मिल पाए। विगत विधान सभा चुनाव के दरमियान राकेश सचान ने अपने हाई प्रोफ़ाइल संबंधों के दौरान भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व स्तर पर सेटिंग की और पार्टी में शामिल होते ही पड़ोसी जनपद की एक सीट से विधायकी का टिकट हासिल कर लिया। और विधायक बनते ही योगी सरकार में केबिनेट मंत्री का सीट हासिल कर ली। इतना ही नहीं उन्हें यहां (फतेहपुर) का प्रभारी मंत्री भी बना दिया गया। उनके समर्थक तो आगामी लोकसभा के चुनाव में उनके प्रत्याशी बनने की भी बात कहते सुने जा सकते हैं!
यहां पर गौरतलब है कि योगी सरकार का जिस तरह से सूबे में आद्योगिक इकाइयों की स्थापना पर खास फोकस है और राज्य मुख्यालय के साथ साथ ज़िला, यहां तक कि तहसील और ब्लाक स्तर तक इन्वेस्टर्स समिट हो रही है, बावजूद इसके जीएमडीआईसी योजना पर सिस्टम गंभीर नहीं हैं। अचरज में डालने वाली बात यह है कि विभागीय जिम्मेदारों के पास जीएमडीआईसी योजना से सम्बन्धित पूरा डाटा भी उपलब्ध नहीं है। यह कहना शायद गलत न होगा प्रायः भ्रष्टाचार के नए नए आयाम स्थापित करते रहें सम्बन्धित विभाग ने जीएमडीआईसी जैसी महत्वपूर्ण योजना के रसातल में पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है, अगर पूरी योजना की कायदे से जांच हो जाए तो और भी कई राकेश सचान सरीखे मामले मामले पकड़ में आ सकते हैं!

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com