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गुटखा के बिक्री के खिलाफ धर्मेंद्र पहुंचे हाईकोर्ट

  • दायर की याचिका, सरकार को बनाया प्रतिवादी

मुंबई (सं. भा.)  मुंबई सहित महाराष्ट्र में गुटखा सहित तंबाकू उत्पादों पर सरकार द्वारा बैन लगा दिया गया है। बैन लगा होने के बावजूद मुंबई और महाराष्ट्र में गुटखा माफिया सक्रिय हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर तंबाकू उत्पादों जिसमें गुटखा भी शामिल है, अवैध रुप से बेचा जा रहा है। प्रतिबंधित तंबाकू – उत्पादों जैसे गुटखा, पान मसाला, सुपारी  की बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि महाराष्ट्र सरकार को एक विशेष जांच दल (SIT) बनाने का आदेश दिया जाए ताकि गुटखा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। वसई निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता धर्मेंद्र ने वकील नरेंद्र दुबे के माध्यम से यह जनहित याचिका दायर की है और जल्द ही इस पर सुनवाई होने की संभावना है। उनका कहना है कि गुटखा, पान मसाला, फ्लेवर्ड सुपारी जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री पर अंकुश नहीं लगने से नागरिकों का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता है और उन्हें कैंसर सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। याचिका में दावा किया गया है कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस याचिका में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. तानाजी सावंत, खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री संजय राठौड़ सहित राज्य के मुख्य सचिव पुलिस महानिरीक्षक, मुंबई पुलिस आयुक्त और एफडीए आयुक्त सभी को प्रतिवादी बनाया गया है। तम्बाकू उत्पादन और सेवन से कोई लाभ नहीं है और यह सिर्फ मौत बांटता है।

कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है तम्बाकू

90% फेफड़े और मुंह के कैंसर तंबाकू के कारण होते हैं। तम्बाकू से जुड़ी बीमारियों की सूची लंबी है और इसमें हृदय रोग, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, नपुंसकता, जन्म दोष शामिल हैं।

तम्बाकू के धुएं में 700 से अधिक हानिकारक रसायन और 69 कार्सिनोजेन्स होते हैं, जिनमें निकोटीन, टार और अन्य रेडियोधर्मी पदार्थ शामिल हैं।

■ सिगरेट के धुएं में अमोनिया, आर्सेनिक, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन साइनाइड, डीडीटी, फॉर्मलडिहाइड आदि कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करते हैं।

■ साथ ही भारत में तंबाकू नियंत्रण, रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र यूएसए और डब्ल्यूएचओ की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, तंबाकू का उपयोग दुनिया में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है।

इसके अलावा प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री और वितरण पर सरकार के नियंत्रण की कमी का भी राज्य के राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ा है और इससे हवाला और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे अवैध लेनदेन में भी वृद्धि हुई है, याचिका में कहा गया है।

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