मुंबई (सं. भा.) केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए कच्चे पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में भारी कटौती की घोषणा की है। यह फैसला शुक्रवार, 30 मई को लिया गया, जिसके तत्काल प्रभाव से लागू होने के बाद अब खाद्य तेल की कीमतें करीब 10% तक सस्ती होने की उम्मीद है। इस कदम को खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, कच्चे पाम तेल, कच्चे सोया तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल आयात शुल्क 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है। इस कटौती के बाद, कृषि अवसंरचना और विकास उपकर और सामाजिक कल्याण अधिभार सहित समग्र प्रभावी आयात शुल्क 27.5% से घटकर 16.5% हो जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों की राय और घरेलू रिफाइनर्स को लाभ:
हालांकि सरकार ने इस कदम का उद्देश्य खुदरा महंगाई पर लगाम कसना बताया है, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसे भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड वार्ता से भी जोड़ा जा रहा है। यह अमेरिका की तरफ से बढ़ रहे दबाव को संभालने और संभावित जवाबी टैरिफ से बचने के लिए एक कूटनीतिक कदम हो सकता है।
खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि “इस तीव्र कटौती से उपभोक्ताओं के लिए लागत कम होने तथा उच्च इनपुट कीमतों से जूझ रहे खाद्य तेल रिफाइनर्स को राहत मिलने की उम्मीद है।” इस निर्णय से क्रूड और रिफाइंड ऑयल के बीच ड्यूटी अंतर बढ़कर 19.25% हो गया है, जिससे घरेलू रिफाइनर्स के लिए फायदे की स्थिति बन रही है। अब रिफाइनर्स सस्ता क्रूड इंपोर्ट कर बेहतर मार्जिन पर घरेलू स्तर पर रिफाइनिंग कर सकते हैं। इससे नेपाल जैसे ‘साफ्ता’ देशों से जीरो ड्यूटी पर आयातित रिफाइंड तेल का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। यह कदम न सिर्फ उपभोक्ताओं को राहत देगा, बल्कि घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को भी मजबूती प्रदान करेगा।


