तमिलनाडू के नीलगिरी जिले के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसे में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ( सीडीएस ) जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी सहित 13 सैन्य अफसर कर्मियों का निधन हुआ , इस हादसे में जान गई – जनरल विपिन रावत , मधुलिका रावत , लेफ्टिनेंट जनरल हरजिंदर सिंह , ब्रिगेडियर एल.एस. लिड्डर , नायक गुरसेवक सिंह , नायक जितेन्द्र कुमार , लांस नायक विवेक कुमार , लांस नायक तेजा , हवलदार सतपाल सिंह , विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान ( पायलट ) , स्क्वाड्रन लीडर के . सिंह , जूनियर वारंट ऑफिसर दास एवं जूनियर वारंट ऑफिसर प्रदीप ए , जो देश के लिये बहुत बड़ी क्षति है!
जनरल बिपिन रावत वायुसेना के एमआई -17 वीं 5 हेलीकॉप्टर में सुलूर बेस से सवार हुए थे । दोपहर 12:20 बजे नीलगिरी में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया । इस हादसे में एकमात्र कैप्टन वरुण सिंह बचे थे । उनका भी इलाज के दौरान वेलिंगटन स्थित सैन्य हॉस्पिटल में निधन हो गया! वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का!गठन कर हादसे के कारणों की जाँच का ऐलान किया है ।
जनरल रावत ने दिसम्बर 2020 में सीडीएस का पद सँभाला था । तीनों सेनाओं के बीच गहरे समन्वय -सामंजस्य को संस्थागत रूप देने के बड़े काम को आगे बढ़ा रहे जनरल रावत का लक्ष्य कम समय में भारतीय सेनाओं को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिये पूरी तरह से तैयार करना था । यह जिम्मेदारी प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने जनरल रावत को सौंपी थी । सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने पहला बड़ा कदम हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद में समन्वय की दिशा में उठाया था । साहसिक और सटीक फैसलों के लिये जाने जाते थे विपिन रावत | 2015 आतंकरोधी ऑपरेशन को जनरल रावत ने सफलतापूर्वक संचालित किया । 2016 में कश्मीर के उड़ी में भारतीय सेना के कैम्प पर कायराना हमला हुआ तो जनरल के निर्देशन में ही आतंकियों को पाकिस्तान में घुसकर धूल चटाने की योजना बनी और सफलता प्राप्त हुई । 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक थल सेना प्रमुख के तौर पर रणनीति बनाई । अरुणाचल प्रदेश में 11 गोरखा राइफल्स की पाँचवीं बटालियन के कमांडर रहे । ब्रिगेडियर के तौर पर कश्मीर के सोपोर में राष्ट्रीय रायफल्स की कमान सँभाली । आप संयुक्त राष्ट्र शान्ति सेना में रहे तथा दो बार आपको फोर्स कमांडेंट कमेडेशन भी मिला । 40 वर्षों के सैन्य करियर में जनरल बिपिन रावत ने शौर्य से सेना में कमीशन पाने से लेकर देश का पहला सीडीएस बनने का गौरव प्राप्त किया । आपको परम विशिष्ट सेवा मेडल , उत्तम युद्ध सेवा मेडल , अति विशिष्ट सेवा मेडल , युद्ध सेवा मेडल , सेना मेडल आदि अनेक सम्मान प्राप्त हुए थे । पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के इलाके में सीमा पर चीन की चालबाजी और जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के आतंकवाद के छद्म युद्ध की दोहरी चुनौतियों को लेकर हमेशा मुखर रहे जनरल रावत की मौत ने सभी को हिलाकर रख दिया । उनकी मृत्यु के बाद उनके अगले उत्तराधिकारी के सामने सेना के एकीकृत थियेटर कमान की प्रणाली को यथाशीघ्र हकीकत में बदलने की बड़ी चुनौती होगी । सीडीएस के पद को शीघ्र ही भरा जाएगा । तीनों सेनाओं के प्रमुखों में से अगला सीडीएस चुना जायेगा । भारत उनकी सेवाओं को कभी नहीं भुला पायेगा ।
शत् शत् नमन — जय हिन्द जय भारत ।
– नन्दिनी रस्तोगी ‘ नेहा , मेरठ


