वीर शिवाजी की धरती को,
सत् सत् नमन हमारा।२।
महाराष्ट्र है बसा दिलों में,
लगता सबसे न्यारा
सत् सत् नमन हमारा, सत् सत् नमन हमारा।
जन्मभूमि को छोडके आये,
जब हम यहाँ कमानें को।
कर्मभूमि माया नगरी में,
अपना पैर जमाने को
सब कुछ पाया इस मुंबई में
हरदम मिला सहारा
सत् सत् नमन हमारा, सत् सत् नमन
अपनें मेहनत के बलबूते,
भाग्य सभी आजमाये हैं।
मनोकामना पूर्ण हुई सब,
झोली भरकर पाये है
इसीलिये तो लगता है ये
मुझको जान से प्यारा
सत् सत् नमन हमारा, सत् सत् नमन
आये जो भी यहीं का होके,
रह गये आने वाले सब
इस मिट्टी को समझ के चंदन,
माथ लगाने वाले सब
कितनी इसकी किर्ती गाउँ
चमका सदा सितारा
सत् सत् नमन हमारा, सत् सत् नमन
गीतकार * रसियाकुमार


