- मुफ्त में करना होगा गरीबों का इलाज
- राज्य सरकार ने गठित की समितियां
मुंबई (सं. भा.) : मुंबई सहित राज्य के चैरिटेबल अस्पतालों पर अब सरकार की और भी पैनी नजर रहेगी। सरकार ने तीन समितियां गठित की हैं। पहली कमिटी मुंबई और दूसरी कमिटी जिला स्तर पर ट्रस्ट के अस्पतालों का हर 3 महीने में ऑडिट करेगी। इसमें कितने गरीब मरीजों का उपचार किया, उनसे कितना पैसा लिया गया और गरीब मरीजों के लिए रखे गए (IPF) फंड का कितना उपयोग किया गया है, इसका हिसाब लिया जाएगा। इसके बाद यह समिति सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि समिति अपनी जिम्मेदारियों का सही से निर्वाह करेगी तो ट्रस्ट के अस्पताल मरीजों को लूट नहीं सकेंगे।
गौरतलब है कि चैरिटेबल अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए 20 फीसदी बेड्स आरक्षित होते हैं। इनमें 10 फीसदी बेड्स| पर गरीब मरीजों को 50 प्रतिशत शुल्क पर इलाज दिया जाता है और शेष 10 फीसदी बेड्स पर गरीबी रेखा के नीचे वाले मरीजों को मुफ्त में उपचार किया जाता है। कई बार मरीजों की यह शिकायत होती है कि अस्पताल उन्हें बेड्स खाली नहीं हैं बोल कर कन्नी काट लेते हैं। एक सप्ताह पहले ही सरकार ने एक समिति बनाई, जिसे राज्य में मदद और मार्गदर्शन कक्ष स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी बीच मुंबई सहित राज्य में कुल 430 चैरिटेबल अस्पतालों को अब गरीब मरीजों को दिए गए उपचार का हिसाब देना होगा। सार्वजनिक आरोग्य विभाग ने 18 जुलाई को मुंबई और अन्य जिलों में अस्पतालों के ऑडिट के लिए दो अलग समितियां बनाई हैं।

मुंबई के प्रमुख चैरिटेबल अस्पताल
मुंबई में प्रमुख चैरिटेबल अस्पतालों में नानावटी अस्पताल, लीलावती अस्पताल, कोकिलाबेन अस्पताल, एचएन रिलायंस अस्पताल, पीडी हिंदुजा अस्पताल, हीरानंदानी अस्पताल, बॉम्बे अस्पताल, सैफी अस्पताल, ब्रीच कैंडी अस्पताल शामिल हैं।
अस्पताल को IPF का देना होगा हिसाब
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चैरिटेबल अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए IPF फंड होता है। यदि किसी मरीज की आर्थिक स्थिति खराब है तो अस्पताल इस IPF फंड का उपयोग कर जरूरतमंद मरीज का उपचार कर सकता है। अस्पताल को अब IPF फंड की पाई-पाई का हिसाब भी देना होगा। इससे यह पता चलेगा कि अस्पताल ने फंड का कहां और कितना उपयोग किया है।
सात सदस्यों की उच्च स्तरीय कमिटी
मुंबई व अन्य जिलों द्वारा ऑडिट की गई अस्पतालों की रिपोर्ट 7 सदस्यों वाली उच्च स्तरीय कमिटी को सौंपनी होगी। प्रधान सचिव सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमिटी गठित की गई है। इसमें विधि और न्याय विभाग के प्रधान सचिव, चैरिटी कमिश्नर आदि को शामिल किया गया है।


