मुंबई (सं. भा.) आईपीसी की धारा 376, 376ए, 376बी, 376सी, 376डी, 376जी के तहत केस की पीडिता का नाम प्रिंट या पब्लिश करने पर दो साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। ऐसे ही एक मामले में बॉम्बे व्हाईकोर्ट ने एक याचिका में बलात्कार पीड़िता का नाम उजागर करने वाली कानूनी फर्म पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। बंबई उच्च न्यायालय ने हाल ही में पाया था कि बार-बार अधिवक्ताओं को बलात्कार पीड़िता के नाम का खुलासा नहीं करने के लिए कहने के बावजूद इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है, जबकि इसके उल्लंघन पर दो साल के कारावास का प्रावधान था। अदालत ने नाम का खुलासा करने के लिए याचिका का मसौदा तैयार करने वाली कानूनी फर्म पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। वकीलों ने याचिका में जहां कहीं भी पीड़िता का नाम सामने आया है, उसे छिपाने के लिए याचिका में संशोधन करने की मांग की थी, जिसकी -अनुमति पीठ ने दे दी। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते – डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज के. चव्हाण की खंडपीठ ने पुणे पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ बलात्कार, विश्वास का आपराधिक उल्लंघन के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

याचिका पर सुनवाई करते हुए HC ने की टिप्पणी
वकील जैद अनवर कुरैशी ने याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी फर्म हुयालकर एंड एसोसिएट्स द्वारा निर्देशित याचिका में पीड़ित के नाम को छिपाने के लिए याचिका में संशोधन करने की अनुमति मांगी, जिसकी अदालत ने अनुमति दे दी और वकील को उसी दिन करने के लिए कहा। बेंच ने 8 फरवरी 2023 को सुनवाई की अगली तारीख तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष मामले की करवाई टाल दी है।


