- आदेश के बावजूद दुकानदारों को नही दे रही मुआवजा
मुंबई (सं. भा.) : कोर्ट का आदेश सर्वोपरि होता है। उसके द्वारा दिए गए आदेश या निर्देश का पालन करना हर भारतीय के लिए अनिवार्य है। दूसरी ओर बॉम्बे हाईकोर्ट के दो जजों के एक पीठ ने दहिसर के 11 दुकानदारों को 100 प्रतिशत मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुंबई बीएमसी है कि इस आदेश को ही ठेंगा दिखाती नजर आ रही है। पीठ के आदेश के बाद भी यचिकाकर्ता दुकानदार मुआवजे के लिए भटक रहे हैं।
गौरतलब है कि मुंबई महानगर पालिका द्वारा दहिसर में तोड़ी गई 11 दुकानों के बदले कोर्ट ने 100 प्रतिशत मुआवजा देने का आदेश दिया है। बीएमसी की तरफ से कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने के लिए कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि यही समय है बीएमसी उचित और न्यायसंगत आदेश का पालन करे। बीएमसी द्वारा दहिसर में 11 छोटे दुकानदारों की दुकानों को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया था। बीएमसी की इस कार्रवाई के खिलाफ वर्ष 2017 में अनिल शुक्ला व दस अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि भले ही दुकानें छोटी थी, उसे बीएमसी द्वारा अवैध रूप से तोड़ने का दावा अधिवक्ता अमरेंद्र मिश्रा ने किया था। इस पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ताओं को 1961 से पहले आवंटित भूमि के आकार के अनुसार तत्काल फ्लैट आवंटित किए जाएं। साथ ही, कोर्ट ने बीएमसी प्रशासन को 2018 में दुकानदारों की असुविधा के लिए मुआवजा देने का निर्देश दिया था। लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद बीएमसी ने केवल 75 प्रतिशत मुआवजा दिया।
2017 में दायर की थी याचिका
बीएमसी की तरफ से आदेश का पूरी तरह पालन नहीं करने पर याचिकाकर्ताओं ने फिर कोर्ट की शरण ली। बीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल साखरे ने पिछले साल उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि बीएमसी की प्रचलित नीति के अनुसार वैकल्पिक भूमि या वित्तीय मुआवजा प्रदान करने के लिए तैयार है। हालांकि, मिश्रा ने दावा किया कि उन्हें दी जा रही पर्यायी जगह अयोग्य है और 2018 में दिए गए आदेश के अनुरूप नहीं थीं। कोर्ट ने जुलाई 2021 में बीएमसी को विभिन्न विकल्पों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया और अंत में फरवरी 2022 में दुकान मालिक को जगह के लिए 100 प्रतिशत मुआवजा देने को कहा। लेकिन बीएमसी केवल 75 फीसदी मुआवजा दिया याचिका की पिछले सप्ताह जस्टिस अमजद सईद और जस्टिस अभय आहूजा पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। उस आदेश की एक प्रति हाल ही में जारी की गई थी। बीएमसी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर पा रही है। पीठ ने आदेश में कहा, कोर्ट के आदेश के बाद भी याचिकाकर्ता अभी भी भटक रहे हैं।


