घोर गुलामी वाला साया,
जब भारत पर छाया था ।
पूत भारती का नर – नाहर,
बन अवतारी आया था ।।
इन्क़लाब का नारा जिसकी,
पिस्टल से लहराया था ।
दुनिया को सशक्त क्रान्ति का,
जिसने पाठ पढ़ाया था ।।
अंगरेजी छाती पर चढ़कर,
रौद्र रूप दिखलाया था ।
ज़िन्दा पकड़ न सके फिरंगी,
वो सिंहनी का जाया था ।।
चंद्रशेखर था ब्रह्मपुत्र,
जग में ‘आज़ाद‘ कहाया था ।
देवराज‘ है नमन उसे,
जो वन्दे मातरम् गाया था ।।
कवि– देवराज


