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भू- माफियाओं ने पुलिस प्रशासन की मिली भगत सरकारी जमीन पर किया कब्जा

  • पत्रकार ने मुख्यमंत्री व प्रशासन को लिखा पत्र
  • किया न्याय की मांग

प्रयागराज (उ.प्र.), उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में पुलिस और राजस्व विभाग में नाकारापन और भ्रष्टाचार चरम सीमा तक बढ़ा है। अधिकारियों के इसी नाकारापन और भ्रष्टाचार की वजह से दिन दूना रात चौगुना प्रेदेश के गांव – गांव में भूमाफिया पैदा हो रहे हैं।
ऐसी जानकारी शासन – प्रशासन के सूत्रों ने दी और बताया कि पहले ये भू-माफिया सरकारी ज़मीन को अपने बाप की जागीर समझकर कब्जा करते हैं फिर धीरे धीरे लोगों के निजी प्रॉपर्टी पर कब्जा करना शुरू कर देते हैं। इस काम के लिए भूमाफिया बक़ायदा प्लान तैयार करते हैं जिसमें वकील, पुलिस व राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की गैंग शामिल रहती है। यह गैंग मोटी रक़म लेकर कुछ भी रिपोर्ट तैयार करके संरक्षण देकर ज़मीन कब्जा करवा देते है फिर पीड़ित व्यक्ति शासन प्रशासन के दफतरों के चक्कर लगाता रहता है और भू-माफियाओं का दिन ब दिन मनोबल बढता जाता है और अंततः जैसे अभी २ अक्तूबर २०२३ को देवरिया में ज़मीनी विवाद में ६ लोगो की जान चली जाती है , और उक्त मामले में मुख्यमंत्री द्वारा लापरवाह लेखपाल, तहसीलदार, एस.डी.एम., सी.ओ./एस.ओ., थाना प्रभारी, पुलिस कांस्टेबल सहित १५ अधिकारियो को सस्पेंड कर दिया गया ।ठीक इसी तरह उत्तर प्रदेश में ज़मीन विवाद से जुड़े ६५९४५ मामले है, जिसमे जौनपुर ज़िला में ४९०७, बलिया ज़िला मे ४०६८, झाँसी ज़िला में ३१३४, प्रयागराज ज़िला में २४१९, लखीमपुर खीरी में ३५८६, गोरखपुर में ३४६० केस लंबित यानी पेंडिंग है।

उत्तरप्रदेश में ज़मीनी विवाद में संबंधित विभागों के अधिकारियो के नकारेपन व भ्रष्टाचार की वजह से ज़मीनीं विवाद चरम सीमा पर पहुँच गई है। जिसमें सन् २०१७ से २०२१ तक ज़मीनी विवाद मारपीट के दौरान ३०२१ लोगो की जान गई है ।
ठीक इसी प्रकार से प्रयागराज ज़िला के मेज़ा थाना के अंतर्गत चौकठा गौरा गाँव में न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद भी मेज़ा थाना के एस.आई.- उमेश पटेल की मिलीभगत व संरक्षण में खुलेआम न्यायलय के आदेश की धज्जियाँ उड़ाते हुए सरकारी चकमार्ग पर कब्जा किया गया ।


अवैध कब्जे से प्रभावित चौकठा गौरा गाँव निवासी दीनानाथ तिवारी, भोलानाथ तिवारी पुलिस के आला अधिकारियों और शासन प्रशासन से शिकायत की उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से परेशान होकर मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल के अलावा संबंधित विभागों को लिखित शिकायत पत्र देकर अपनी व्यथा दर्ज करायी है। पेशे से पत्रकार दीनानाथ तिवारी का आरोप है कि उनके गाँव में रहने वाले हौसलाप्रसाद रामशीरोमणि मिश्रा और उनका बेटा संतोष हौसलाप्रसाद मिश्रा द्वारा सरकारी चाकमार्ग (चकमार्ग संख्या- २७२ रक़बा ०.०१६ हे. एवं चकमार्ग संख्या- २६७ रक़बा ०.०४४ हे.) पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है । इतना ही नहीं इन्होंने ने अपने गुंडागर्दी और बेटे के वकालत की साख का फ़ायदा उठाते हुए ना ही सरकारी चकमार्ग बल्कि हमारी पुस्तैनी ज़मीन (बग़ीचा) जिसकी (भूमि संख्या- २३२क रक़बा ०.१७७० हे.) पर सन् २०१६ में अवैध कब्जा करके शौचालय का निर्माण शुरू कर दिया जिसके ख़िलाफ़ हमारे भाई भोलानाथ तिवारी ने ज़िला न्यायालय में सूट फाइल करके केस दाखिल किया जिसका केस न.२६२/२०१६ है और इसके सुनवाई में न्यायलय अपर लघु न्यायाधीश जी ने २४/०५/२०१६ को आदेश में हौसलाप्रसाद मिश्रा के कब्जे को अवैध बताते हुए हस्तक्षेप को निषेधित किया ।


बता दें कि इस क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ जब पत्रकार दीनानाथ तिवारी के भाई भोलानाथ तिवारी ने लेखपाल, तहसीलदार, एस.डी.एम., को जब शिकायत किया तो वापस चकबंदी का माप पूरे गाँव के लोगो, पुलिस प्रशासन के मौजूदगी में तहसील के कर्मचारियों व अधिकारियो ने किया जिस्म पाया गया कि हौसलाप्रसाद मिश्रा ने सरकारी सम्पति पर अवैध कब्जा किया है और रिपोर्ट में लेखपाल ने इनके ख़िलाफ़ लोक संपत्ति अधिनियम की धारा ३/५ के तहत मामला दर्ज किया परंतु पुलिस द्वारा आज तक एफ.आई.आर. तक इस मामले में दर्ज नहीं की गई ।
बता दें कि संतोष मिश्रा का स्थानीय पुलिस के साथ साँठगाँठ अच्छी होने के वजह से लेखपाल के रिपोर्ट के बावजूद इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था । ग़ौरतलब है कि जब स्थानीय मेज़ा थाने के एस.आई. उमेशचंद पटेल के हाथ में फाइल लगी तो उन्होंने संतोष हौसलाप्रसाद मिश्रा के साथ साँठगाँठ करके पुलिस थाने के अंदर समझौता कराया कि संतोष मिश्रा का घर बनाने दे और वे अपने घर के पीछे पूर्व दिशा (बगीचा ) की तरफ़ खिड़की, दरवाज़ा, या पानी का निकषी नहीं करेंगे । यह सुलहनामा दोनों पक्षों के वकीलों के सामने दिनांक ०६/०६/२०२३ को हुआ और दोनों पक्षों को समझौता पत्र दिया गया।
बता दें कि संतोष मिश्रा जैसे की अपने प्लान के हिसाब से दो महीने तक उसने कुछ नहीं किया फिर इसने प्लान के मुताबिक़ एस.आई. उमेशचंद पटेल के संरक्षण में ३० अगस्त २०२३ को ज़बरदस्ती सरकारी आदेश का उल्लंघन करते हुए दीनानाथ तिवारी के पुस्तैनीं ज़मीन में २०१६ में जबरन किए हुए गड्ढे में शौचालय की पाइप लाइन डाल दिया और ३१/०८/२०२३ को ज़बरदस्ती अपने घर का पहले से बनी दीवाल तोड़कर दरवाजा श्री तिवारी के ज़मीन की तरफ़ निकल कर कब्जा कर लिया जिसके ख़िलाफ़ दीनानाथ तिवारी, भोलानाथ तिवारी , बसंती देवी शिवशंकर शुक्ला ने स्थानीय पुलिस थाने में कोर्ट के आदेश के उल्लंघन करने के ख़िलाफ़ शिकायत की परंतु स्थानीय मेज़ा सी.ओ. व मेज़ा थाने के एस.आई. उमेशचंद पटेल ने मामले की लिपापोती करदी मगर कोई भी कार्रवाई नही की तो संतोष मिश्रा और हौसलाप्रसाद मिश्रा का मनोबल बढ़ गया और एस.आई. उमेशचंद पटेल के संरक्षण में २७/०९/२०२३ को खिड़की भी श्री तिवारी की पुस्तैनीं ज़मीन की तरफ़ खोल दिया जिसके बाद दीनानाथ तिवारी की बेटी ने इन अवैध निर्माण का काला कारनामा का फोटो, वीडियो निकाला जिसके आधार पर दीनानाथ तिवारी ने शासन प्रशासन से इनके ख़िलाफ़ २०१६ में लेखपाल के रिपोर्ट के आधार पर लोक संपत्ति अधिनियम ३/५ के तहत एफ.आई.आर. दर्ज करने हेतु शिकायत की है, और उन्होंने माँग की है कि जैसे हौसला प्रसाद मिश्रा ने जो सरकारी चकमार्ग पर कब्जा किया और न्यायलय के आदेश का उल्लंघन किया है इसलिए इनके ऊपर सख़्त से सख़्त कार्रवाई की जाये ताकि ग्रामवासियों का विश्वास शासन प्रशासन पर बना रहे । और श्री तिवारी ने शासन प्रशासन को आगाह करते हुए माँग किया है कि अगर समय रहते ये लालची भू-माफ़ियाओ पर लगाम नहीं लगाया गया तो जो भी गंभीर परिणाम होंगे उसका ज़िम्मेदार शासन प्रशासन के अधिकारी होंगे।

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