मुंबई(सं.भा.) मुंबई में बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट की आशंका गहराने लगी है। पानी की लगातार बढ़ती मांग और सप्लाई को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच अब प्रशासन ने पारंपरिक जल स्रोतों की ओर रुख किया है। शहर के पुराने कुएं और तालाब एक बार फिर उपयोग में लाने की तैयारी शुरू हो गई है, ताकि आने वाले दिनों में पानी की कमी से निपटा जा सके। इस दिशा में बीएमसी ने ठोस कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

महापौर रितु तावड़े ने जल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर शहर में उपलब्ध सभी पुराने कुओं, तालाबों और बोरहोल की विस्तृत जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। कई जल स्रोत समय के साथ लुप्त हो चुके हैं, जिन्हें पुनर्जीवित कर पानी की आपूर्ति को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
प्रशासन ने उन कुओं को प्राथमिकता देने की बात कही है, जिन्हें जल्द चालू किया जा सकता है। साथ ही, इन जल स्रोतों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर यह तय किया जाएगा कि उन्हें पेयजल के रूप में कितना उपयोग किया जा सकता है।
महापौर ने कहा कि बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए जल प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन जल स्रोतों का उपयोग केवल बागवानी या सफाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि जरूरत के अनुसार पेयजल आपूर्ति में भी शामिल किया जा सकता है।
इसके साथ ही हाउसिंग सोसाइटियों और औद्योगिक क्षेत्रों से सहयोग की अपील की गई है। उन्हें अपने क्षेत्र में मौजूद कुओं की नियमित सफाई, मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ-साथ रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाने पर जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में पानी की कमी से बचा जा सके।


