मुंबई (सं भा): मलाड पश्चिम के मड आइलैंड में 880 से अधिक बंगलों के नक्शों में हेराफेरी और जालसाजी के मामले की जांच बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष है। कोर्ट ने इस मामले में मनपा पी/नार्थ और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि यदि आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए, तो एफआईआर दर्ज की जाए।
एसआईटी की जांच में सामने आया कि बीएमसी और कलेक्टर कार्यालय ने जांच में सहयोग नहीं किया। कोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया कि वह 10 दिन के भीतर सभी जरूरी दस्तावेज एसआईटी को सौंपे।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि पुलिस ने यह नहीं पता लगाया कि बंगलों के संरचनात्मक सर्टिफिकेट वैध हैं या जाली। अप्रैल 2025 में दर्ज बयानों के अनुसार एजेंटों को भुगतान किया गया और फिर बीएमसी को राशि भेजी गई, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी संबंधित दस्तावेज तुरंत एसआईटी को उपलब्ध कराए जाएँ।


