मुंबई (सं. भा.)। समुद्री तुफान के दौरान उठने वाली ऊंची लहरों से जन जीवन को बचाने मे महत्वपर्ण भूमिका निभाने वाले मैंग्रोज के पेड़ों को काटने पर हाई कोर्ट ने रोक लगाई हुई है। इसके बावजुद भी चोरी छूपे भूमाफियाओं द्वारा मैंग्रोज को नुकसान पहुचाया जाता रहा है। अदालती रोक और पुलिस के बढ़ते हस्तक्षेप को देखते हुए चालबाज भुमाफियाओं ने नई पैतरेबाजी शुरु की है। शहर से निकलने वाले डेब्रिज को डंपिंग ग्राउंड समेत अन्य जगह डालने की बजाय खाड़ी मे डालकर उसे पाटने का काम किया जा रहा है। इससे जहां इन लोगों पर मैग्रोज को काटने का आरोप नहीं लगता वहीं खाड़ी पाटकर जमीन का टुकड़ा बनाकर वहां अवैध निर्माण करने मे आसानी हो जाती है। भाजपा नगरसेवक विनोद मिश्र ने इस मुद्दे को जोर सोर से उठाते हुए राज्य सरकार और मनपा प्रशासन पर आरोप लगाया है कि स्थानीय नेताओं की मिली भगत से मैंग्रोज के पेड़ों को दबाने का काम किया जा रहा है। यहिं नहीं मालवणी के चीकूवाड़ी, शंकरवाड़ी तथा पटेलवाड़ी स्थित सरकारी जमीन जो गोचरण के लिए आरक्षित है उस पर अवैध निर्माण कर बस्तिया बसा दी है। जिसमे गरीब लोग ग्राहक बनकर फंस चुके है। मालाड में अरेंगल समुद्री तट के किनारे की १८ एकड़ जमीन पर उद्धव सरकार द्वारा सैकड़ों पेड़ों को डेब्रिज से दबाकर खत्म किए जाने का आरोप बीजेपी नेता विनोद मिश्र ने लगाया है। अभी भी हजारों पेड़ों को डेब्रिज के नीचे दबाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि जब बीएमसी अधिकारी को ये सब दिखाया गया तो अधिकारी वहां से भाग खड़े हुए। यह सरकार पर्यावरण की दुश्मन है। शिवसेना के युवा नेता वर्तमान में पर्यावरण मंत्री ने मेट्रो-३ कारशेड के लिए पर्यावरण कार्यकर्ताओं के साथ पेड़ काटने का विरोध कर रहे थे। वे एमटीडीसी की इस जमीन का दौरा किया था। उनके दौरे के बाद से ही यहां पेड़ों को काटना और उसे मिट्टी के नीचे दबाने का सिलसिला शुरु किया गया है।


