उन्नाव (सं. भा.)। महाराष्ट्र के भंडारा जिले के सरकारी अस्पताल में आग लगने से 10 बच्चों की मौत होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन जिला अस्पताल में आग बुझाने के संसाधनों को लेकर सजग नहीं है। जिला संयुक्त चिकित्सालय में आग लगने की कोई घटना होने पर उससे बचाव करने के माकूल प्रबंध नहीं हैं। महिला जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भी आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह हाल भी तब है जब कई बार अग्निशमन अधिकारी नोटिस जारी कर चुके हैं।
जिला संयुक्त चिकित्सालय में वार्ड और सुविधाएं तो लगातार बढ़ाई जा रहीं है, लेकिन अग्निशमन प्रबंधों को लेकर अस्पताल प्रशासन सजग है न ही अग्निशमन विभाग। जिला अस्पताल के महिला और पुरुष दोनों ही विभागों के वार्ड, ओपीडी और अन्य स्थानों पर कोई ऐसा हाइड्रेंट प्वाइंट नहीं है जहां कोई घटना होने पर दमकल को पानी मिल सके।
वार्ड में दो फायर एक्सटिग्यूशर लगे हैं, लेकिन कर्मचारी उनका कितना प्रयोग कर सकेंगे यह समय बताएगा। ओपीडी से वार्ड तक आग से बचाव के लिए फायर एक्सटिग्यूशर के अलावा कोई साधन नहीं हैं। जिला महिला अस्पताल के प्रथम तल पर 12 बेड का सिक न्यूबार्न केयर यूनिट (एनएनसीयू) है। एसएनसीयू में शनिवार को 12 बच्चे भर्ती थे जिनमें गंभीर होने पर रविवार को तीन बच्चे रेफर कर दिए गए। एसएनसीयू वार्ड में एक और एक बाहर फायर एक्सटिग्यूशर लगा है। इन्हीं के सहारे एनआरसी और मदर केयर यूनिट भी है। भगवान न करे आग लगने जैसी कोई घटना हो लेकिन अगर घटना हुई तो बुझाना मुश्किल हो जाएगी।
कई बार दी जा चुकी है नोटिस
– जिला अग्निशमन अधिकारी शिवदरस प्रसाद ने बताया कि महिला और पुरुष दोनों ही अस्पतालों में मानक के अनुसार आग बुझाने के संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। कई बार नोटिस दी जा चुकी है। दोनों अस्पताल के सीएमएस बजट मिलते ही मानक के अनुसार प्रबंध करने का आश्वासन देते आ रहे हैं।
नयी इमरजेंसी में हाइडेंट प्वाइंट और पाइप का मानक के अनुसार प्रबंध है। पुराने अस्पताल भवन में प्वाइंट नहीं हैं इसके लिए निदेशालय को पत्र भेज बजट की मांग की गई है। कर्मचारियों को फायर एक्सटिग्यूशर के प्रयोग का प्रशिक्षण दिला रिहर्सल करा चुका हूं।
– डॉ. बीबी भट्ट, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल
– स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेज अग्निशमन विभाग के मानक के अनुसार व्यवस्था कराने के लिए एस्टीमेट बनवाने और उसके लिए धन की मांग कर चुकी हूं। एसएनसीयू, वार्ड, ओटी लेबर रूम आदि सभी जगह फायर एक्सटिग्यूशर लगे हैं। कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है।
– डॉ. अंजू दुबे, सीएमएस महिला जिला अस्पताल
निजी अस्पतालों का हाल भी बुरा
– जिले में निजी अस्पतालों का हाल भी बुरा है। यहां करीब 91 पंजीकृत निजी अस्पताल हैं। इनमें भी मानक के अनुसार आग बुझाने के प्रबंध नहीं हैं। फायर एक्सटिग्यूशर के सहारे काम चलाया जा रहा है। इसपर भी प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अनदेखी किए हुए हैं।


