- राज्य के स्वास्थ्य विभाग पड़ा बीमार
मुंबई (सं. भा.) एक ओर सरकार स्वास्थ्य पर पर्याप्त धनराशि नहीं देती, दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्य निदेशक, संयुक्त निदेशक, जिला सर्जन समेत 17 हजार 864 पद खाली हैं। विभाग के डॉक्टर यह सवाल उठा रहे हैं। कि ऐसी विपरीत परिस्थिति में स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी कैसे आगे बढ़ाई जाए ? मुख्यमंत्री बनने के बाद एकनाथ शिंदे ने स्वास्थ्य बजट दोगुना करने का ऐलान किया था। स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया और बजट में 6,338 करोड़ रुपये की मांग की, लेकिन हकीकत में वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सिर्फ 3,501 करोड़ रुपये देकर स्वास्थ्य विभाग की नाक में दम कर दिया। इस 3,501 करोड़ रुपये में से 1,400 करोड़ रुपये महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और 1,200 करोड़ रुपये केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च किये जायेंगे। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि शेष 900 करोड़ रुपये का उपयोग स्वास्थ्य विभाग को कैसे किया जा सकता है।
नियमित 80 करोड़ की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत वर्तमान में चल रहे और स्वीकृत अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण के लिए 3 हजार 900 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। नियमित रखरखाव के लिए 80 करोड़ रुपये की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि ‘बालासाहेब ठाकरे दुर्घटना बीमा योजना’ जैसी योजनाएं वर्षों तक केवल कागज पर ही बनी रहती हैं।

नहीं भरे जाते पद
स्वास्थ्य सेवा आवश्यक सेवा होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग में 17 हजार 864 पद नहीं भरे गये हैं। कई वर्षों से हर स्वास्थ्य मंत्री हर सत्र में इन पदों को भरने की घोषणा करते हैं, लेकिन असल में पद भरे ही नहीं जाते हैं। इसके चलते बहुत कम वेतन पर संविदा के आधार पर डॉक्टरों के पदों को भरकर स्वास्थ्य प्रशासन पर जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य प्रबंधन करने वाले 76% पद खाली
दोनों स्वास्थ्य निदेशक राज्य के स्वास्थ्य का प्रबंधन करने वाले स्वास्थ्य निदेशालय में अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं। अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक सहायक निदेशक के कुल 42 स्वीकृत पद हैं, इनमें से 32 पद नहीं भरे गये हैं। यह अनुपात 76% है।


