जौनपुर (सं. भा.) : केराकत थाना क्षेत्र निवासिनी बहू से तहरीर लेकर ससुर को दुष्कर्म में फंसाने की धमकी देने, चौकी पर मारने-पीटने तथा 30 हजार लेकर छोड़ने के आरोप में तत्कालीन चौकी इंचार्ज थानागद्दी व सिपाही के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश अपर सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट ने शनिवार को थानाध्यक्ष को दिया।
छोटेलाल सरोज निवासी सोहनी ने चौकी इंचार्ज थानागद्दी रहे त्रिवेणी सिंह व सिपाही सुरेंद्र कुमार राय (अब तैनाती पतरही चौकी) के खिलाफ धारा 156 (3) के तहत दरखास्त दिया कि चौकी इंचार्ज ने वादी की बहू से झूठे कथनों के आधार पर एक प्रार्थना पत्र लिखवाकर लिया, जिसमें वादी पर बहू ने बदनीयती से अभद्रता तथा ससुराल के अन्य लोगों पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया। पुलिस को दोनों पक्षों को बुलाकर समस्या का निराकरण करना चाहिए था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने बहू के दबाव में गत 7 अगस्त को उसे घर से जबरन गाड़ी में बैठाया और चौकी पर ले जाकर जातिसूचक गालियां देते हुए बेरहमी से पीटा। कहा कि 30 हजार अगर हमें नहीं दोगे तो तुम्हारे खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज देंगे। वादी ने मजबूर होकर तीस हजार रुपये चौकी इंचार्ज व सिपाही को दिया। थानाध्यक्ष व एसपी को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संगीन मामला पाते हुए उक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
रामपुर थाना क्षेत्र निवासी अनुसूचित जाति के रविकांत को पड़ोसियों की शह पर मारने-पीटने के मामले में दारोगा समेत दो के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश अपर सत्र न्यायाधीश ने दिया है। रविकांत ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत थाना सुरेरी के एसआइ रामप्रवेश व अच्छेलाल पांडेय के खिलाफ दरखास्त दिया कि वह राजगीर है तथा गुलशन पांडेय के मकान का निर्माण मजदूरों को लेकर एक माह से करा रहा था। गुलशन के पट्टीदार निर्माण से खुश नहीं थे। रोकने का प्रयास किया, लेकिन रुका नहीं। पट्टीदारों ने गत 28 अगस्त को अकारण पुलिस को बुलवाया। पुलिस गुलशन के लड़के राहुल तथा वादी को थाने पर ले गई। एसआइ रामप्रवेश ने गालियां देते हुए बेरहमी से पीटा। राहुल ने बचाना चाहा तो उसे भी मारे। वादी व राहुल का शांति भंग में चालान भी कर दिया। पुलिस ने हम लोगों का मेडिकल भी कराया, लेकिन रिपोर्ट अपने पास रख लिया। मुचलके पर छूटने के बाद वादी ने जिलाधिकारी को दरखास्त दिया। डीएम के आदेश पर सीएमओ ने मेडिकल व एक्स-रे करवाया। जिसमें हाथ टूटा पाया गया। पुलिस के उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया गंभीर मामला पाते हुए आरोपियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया।


