आज का मीडिया ,प्रिंट मीडिया ,रेडियो ,अभी तक बहुत दूर तक आधुनिक किस्म के एक पूर्ण सत्य के निर्माण में लगे नज़र आते हैं ,मगर उन्ही के भीतर बहुत कुछ ऐसा होता है जो उपभोग ,अस्मिता ,विकेंद्रण और आज़ादी की बात करता है |अपने यहाँ का मीडिया इसे अपने अपने ढंग से हल करता है |एक ज़माना था जब मीडिया का नारा था आज़ादी |गुलामी से आज़ादी |संकीर्णता और रूढ़िवादिता से आज़ादी | और यह आज़ादी मीडिया की उस मध्यवर्ती भूमिका के बिना संभव नहीं है जिसे जनता के प्रति उत्तरदायित्व बोध संभव करता है |मीडियाकर्मियों को कुछ देर ठहर कर यह सोचना चाहिए कि हाईप और यथार्थ में किस तरह भेद करें ,किस तरह सच और यथार्थ परिष्कृत रूप में पाठकों तक,आम जनमानस तक बेलाग पहुँचाया जा सके | आज लाइव मीडिया के युग में जहाँ देश के भाग्य के फैसले तीन घंटे में लिए जाते हैं वहाँ राजनैतिक टिपण्णी भी तीन सेकेण्ड में होगी |जहाँ सब कुछ लाइव होकर भी डेड हो रहा है तो वहाँ प्रिंट मीडिया की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है और हैसियत भी बड़ी हो जाती है | इसी के मद्देनज़र कुछ जुझारू और उत्साही लोगों की एक टीम एकजुट हुई और एक नए समाचारपत्र ने आकर लिया |


संगठन भारत का मुंबई एवं उत्तर प्रदेश में नोटबुक वितरण कार्यक्रम
समाचारों की दुनिया में एक अविस्मरणीय दिन 30 मार्च 2011 | पूरा देश क्रिकेट विश्व कप के स्पर्धा के जोश और उत्साह में डूबा हुआ था, उसी संध्या संचार का समृद्ध वाहक समाचार पत्र ,संगठन भारत का उदय हो रहा था | मुंबई के प्रेस क्लब के एक सभागार में इस समाचार पत्र के आरंभिक अंक का विमोचन किया गया | इसे साझा करते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है कि चौदह वर्ष पहले इसी दिन संगठन भारत के विमोचन और लोकार्पण के आयोजन पर मंच से इसकी सफलता और अपने उद्देश्यों की पूर्ती के लिए शुभकामनाएं देने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ और मैंने कहा था पत्रकारिता की यह मशाल न तो कभी बुझानी चाहिए और न इसकी रौशनी कभी मंद होनी चाहिए | आज इसकी मद्धिम लौ और तेज हुई है| आज इस साप्ताहिक पत्र ने अपने साजो – सामान के साथ अपनी यात्रा के चौदह पड़ाव पार कर लिए हैं, पन्द्रहवें वर्ष की यात्रा में अग्रसर है, फिर से शुभकामना | खबरों की यह यात्रा पाठकों के व्यापक वर्ग के जुड़ाव का प्रतिसाद है |
आज कहा जाता है कि ‘सूचना ही शक्ति है’ जिस व्यक्ति, संस्था, समाज या देश के पास जानकारियां हैं और सभी सूचनाओं से समृद्ध है, उसी के हाथ में शक्ति भी है | यदि सूचनाएँ प्रदान करने का तंत्र विकसित कर लें तो सूचनाएँ सरलता से जनमानस तक पहुंचाई जा सकती है | व्यक्ति से व्यक्ति के बीच परस्पर वैचारिक आदान – प्रदान संवाद कहलाता है | जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति या पूरे समूह और समाज तक अपने विचार पहुँचाना चाहता है, अपने विचारों से उनमें वैचारिक चेतना जागृत करना चाहता है तो इसे संचार कहते हैं | संचार सामाजिक चेतना को जागृत और समृद्ध करते हैं | जिस देश के संचार माध्यम सशक्त हैं उनका विस्तार खुले आकाश की तरह व्यापक है और उस देश के विकास की गति तीव्र हो जाती है |


संगठन भारत के वार्षिकोत्सव का विमोचन
संचार माध्यम सिर्फ सूचनाएँ ही लोगों तक नहीं पहुंचाते बल्कि सूचनाओं के साथ लोगों को शिक्षित करने और मनोरंजन की भूमिकाएं भी निभाते हैं | ये माध्यम लोगों के घरों में परिवार के सदस्य की तरह उपस्थित हो पूरे परिवार को जागृत करने की अपनी भूमिका पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं | आखिर संचार का मुख्य काम क्या है ? संचार मुख्य रूप से सूचनाओं, जानकारियों से समृद्ध करता हुआ समाज में सृजनात्मकता, मतैक्य और सूझबूझ को प्रोत्साहित करता हुआ, समाज में सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देता है, ताकि लोगों, समूह और समाज में शांति और सामंजस्य का भाव बना रहे | इन संचार माध्यमों से ही तो पता चलता है शासन व्यवस्था का आधार क्या है, सरकार का रूप कैसा है, सरकार की लोकप्रियता का स्वरूप कैसा है सरकार जनहित में कितनी सक्रिय है और देश के भविष्य के प्रति कितनी सचेत है और सरकार की इन नीतियों का सही अर्थो में कितना क्रियान्वयन हो रहा है | इन सब पर अपनी पैनी नज़र रखता है संगठन भारत |
आज के इस इलेक्ट्रॉनिक युग में संचार के क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही दुनिया में नित नए अवसर सामने आते रहते हैं किन्तु प्रिंट मीडिया एक दस्तावेज की तरह अपनी जिम्मेदारी के साथ पाठकों के सामने उपस्थित होता है | संगठन भारत साप्ताहिक पत्र अपनी इसी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभा रहा है | पत्र के संपादक राजकिशोर और सम्पूर्ण संपादक मंडल अपने इस सक्रियता और समर्पण के लिए बधाई के पात्र हैं | इनके चौदह वर्षों का अथक परिश्रम, सेवा भाव आगामी वर्षों में उत्तरोतर प्रगति के लिए ऊर्जा पुंज का काम करेगा | गंभीर समाचारों के साथ इसके व्याप्ति का विस्तार हो | संगठन भारत अपनी सार्थकता और उपयोगिता से आम जनमानस के जीवन का अंग बना रहे और पूरी निष्पक्षता के साथ देश और समाज का सजग प्रहरी बना रहे, खबरों के साथ साथ राष्ट्रीय चेतना जागृत करता रहे | मैं संगठन भारत के संपादक राजकिशोर जी एवं पूरी टीम के लिए शुभकामनाओं सहित संगठन भारत को अपनी भूमिका में उत्कर्ष पर पहुँचने की कामना करता हूँ |
आनंद सिंह
सदस्य महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी
उद्घोषक आकाशवाणी, मुंबई


