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सरकारी अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए बांबे हाईकोर्ट में याचिका दायर

मुंबई (सं. भा.) । देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी के चलते समय पर इलाज न मिल पाने से आए दिन हजारों लोगों की मौत हो जाती है। बहुतों को इलाज के लिए दर – दर भटकना पड़ता है। फिर भी सही इलाज के अभाव में आम जन की जिंदगियां खप रही हैं। लोग बेहाल हैं। मगर सरकारी स्वास्थ्य सुविधा पूरी तरह से ध्वस्त है। इसकी बानगी पिछले लगभग डेढ़ सालों में देश में कोविड – 19 महामारी के समय हम सब को देखने को मिली। जब देश के सभी अस्पतालों की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गईं और लोग जिंदगी के लिए त्राहि – त्राहि करने लगे।
देश में डॉक्टरों की इसी कमी को पूरा करने के लिए सरकारी अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज शुरू करना समय की जरूरत है। पंडित यशोदेव एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट ने सरकारी अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज शुरू करवाने के लिए बांबे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि मुंबई के भाभा अस्पताल (बांद्रा), सेवन हिल्स (अंधेरी), भगवती अस्पताल (बोरिवली), शताब्दी अस्पताल (कांदिवली), गोकुलदास तेजपाल (जीटी) अस्पताल (मुंबई), कामा एल्बलेस अस्पताल (मुंबई), पंडित भीमसेन जोशी अस्पताल (भायंदर), राजीव गांधी अस्पताल (मीरा रोड), सिद्धार्थ अस्पताल (गोरेगांव), एस के पाटील अस्पताल (मालाड) में मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेज शुरू किए जाएं। याचिका में ऐसा करने की अनुशंसा की गई है। इसमें कहा गया है कि सरकारी अस्पतालों में भरपूर संसाधन के बावजूद मेडिकल कॉलेज नहीं हैं। याचिका में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की बात कही गई है।
पंडित यशोदेव एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष प्रोफेसर रामदुलार झा के मुताबिक सरकारी अस्पतालों के संसाधनों का इस्तेमाल कर अच्छे और बेहतर मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा सकते हैं। जिससे मेडिकल में प्रवेश के लिए छात्रों की दिक्कत तो कम होगी ही, साथ ही साथ आगामी कुछ वर्षों में ही भारत में डॉक्टरों की  किल्लत खत्म हो जाएगी। आम जन को भी अच्छी मेडिकल सुविधा मुहैया होगी और लोग स्वस्थ रहेंगे। देश के बहुतेरे छात्र यहां के कॉलेजों में एडमीशन न मिल पाने के कारण पढ़ाई के लिए विदेश चले जाते हैं। उन्हें देश के ही कॉलेजों में एडमीशन मिल सकेगा। अधिक मेडिकल कॉलेज होने से यह समस्या भी समाप्त हो जाएगी, जिससे ब्रेन ड्रेन और मनी ड्रेन रुक जाएगा। फलस्वरूप देश का पैसा देश में रहेगा और बेरोजगारी की समस्या को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
प्रोफेसर झा का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज शुरू करना हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजक्ट है। इसके लिए मोदी ने कहा था कि सरकारी अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज शुरू करने वाले शैक्षणिक और चैरिटेबल संस्थानों को रियायत दी जाएगी। उन्होंने दस विश्वस्तरीय सरकारी युनिवर्सिटी और दस निजी युनिवर्सिटी स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया था। जिसके फलस्वरूप पंडित यशोदेव एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट ने  भारत रत्न अटल बिहारी के नाम पर विश्व स्तरीय युनिवर्सिटी की स्थापना के लिए भारत सरकार से मंजूरी के लिेए आवेदन किया है। जो सरकार से मान्यता के अंतिम चरण में है।

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