मुंबई (सं. भा.) देश की आर्थिक राजधानी मुंबई आम तौर पर प्रदूषण के मामले से अछूती रही है। उसके पीछे प्राकृतिक रूप से समुद्र के किनारे होने की वजह से एक बार हवा का बदलाव हो जाना माना जाता है। साथ में शहर के बीच पर्याप्त ग्रीन जोन का होना भी एक बड़ी वजह थी। समय के साथ होते विकास ने मुंबई के ग्रीन जोन को बहुत हद तक नष्ट किया है, जिसका परिणाम भी अब देखने को मिलने लगा है। पिछले सप्ताह मुंबई का प्रदूषण स्तर दिल्ली शहर से भी खराब पाया गया। याचिका में इसके लिए मनपा प्रशासन और ग्रीन जोन की कमी को बताया गया है। ग्रीन बेल्ट खत्म होने के कारण मुंबई को वायु प्रदूषण के साथ-साथ अन्य प्रदूषणों का भी सामना करना पड़ा है।

ग्रीन जोन की कमी
गंभीर समस्या के समाधान की जिम्मेदारी मनपा की है, जबकि उसने इस ओर से आंखें मूंद ली हैं, इसलिए जनहित को ध्यान में रखते हुए याचिका दायर कर मांग की गई है कि हाई कोर्ट अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करके मनपा के संबंधित विभाग की जांच कराए। स्थानीय निवासी अमर टीके, आनंद झा, संजय सुर्वे ने मीडिया रिपोटों के आधार पर मुंबई में बिगड़ते पर्यावरण, बढ़ती वायु और अन्य प्रदूषण, जनित बीमारियों को उजागर करते हुए उच्च न्यायालय में अपील की है। अपील में राज्य सरकार और मनपा को शहर में ग्रीन बेल्ट बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाने का आदेश देने के लिए भी याचिका दायर की गई है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के शहरी उपनगर में वायु प्रदूषण और खराब वायु गुणवत्ता से होने वाली बीमारी से लगभग ढाई लाख लोगों की आबादी पीड़ित हैं। कई लोगों को फेफड़ों में संक्रमण है और बच्चे खांसी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं।


