spot_img
Homeमुंबईस्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: कांदिवली शताब्दी में जरूरी दवाओं की किल्लत

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: कांदिवली शताब्दी में जरूरी दवाओं की किल्लत

मुंबई (सं.भा.): महानगर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों के लिए बीएमसी संचालित अस्पताल ही आखिरी सहारा होते हैं, लेकिन जब वहां जरूरी दवाएं उपलब्ध न हों तो इलाज की पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ता है। कांदिवली (पश्चिम) स्थित भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल, जिसे शताब्दी अस्पताल के नाम से जाना जाता है, इन दिनों दवाओं की कमी से जूझ रहा है।

जानकारी के अनुसार शताब्दी अस्पताल में रोजमर्रा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी दवाएं स्टॉक में नहीं हैं। बुखार, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और पेट से जुड़ी बीमारियों की दवाएं अस्पताल की फार्मेसी में उपलब्ध न होने के कारण डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की सलाह दे रहे हैं। इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों पर पड़ रहा है, जिनके लिए मनपा अस्पताल ही सस्ता और भरोसेमंद विकल्प होता है।

सूत्रों के मुताबिक गैस की दवाएं, एंटीबायोटिक, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली कई टैबलेट्स बीते कुछ दिनों से उपलब्ध नहीं हैं। बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले पैरासिटामोल सिरप की भी कमी बताई जा रही है। इसके अलावा मामूली चोट या संक्रमण में दी जाने वाली एंटीसेप्टिक क्रीम और मानसिक रोगियों के लिए जरूरी दवाओं का स्टॉक भी खत्म होने की बात सामने आ रही है।

शताब्दी अस्पताल में सिर्फ कांदिवली या आसपास के इलाके ही नहीं, बल्कि पालघर और दूरदराज के क्षेत्रों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में दवाओं की अनुपलब्धता से मरीजों को या तो इलाज अधूरा छोड़ना पड़ रहा है या फिर निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी मजबूरी बन गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, टीबी और मानसिक रोगों से पीड़ित मरीजों को नियमित दवाओं की जरूरत होती है। यदि दवा समय पर न मिले तो उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है। अस्पताल प्रशासन को दवाओं के स्टॉक पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए और खत्म होने से पहले आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। इस मामले में अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अजय गुप्ता ने दवाओं की भारी किल्लत की बात से इनकार करते हुए कहा कि वे संबंधित विभाग से जानकारी लेकर स्थिति की समीक्षा करेंगे। वहीं, डायबिटीज के इलाज के लिए आए एक मरीज ने बताया कि वे मुफ्त इलाज और दवा के भरोसे मनपा अस्पताल आए था, लेकिन दवा उपलब्ध न होने के कारण उसे बाहर से महंगी दवा खरीदनी पड़ी। उसका कहना है कि इससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com