मुंबई (सं.भा.): मुंबई के पश्चिम रेलवे ने रेल यात्रियों को स्वच्छ और आरामदायक सफर देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। पश्चिम रेलवे की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में लगे बायो-टॉयलेट सिस्टम की दक्षता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जिससे ट्रेनों के शौचालयों में फैलने वाली दुर्गंध को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
इसके तहत लोअर परेल स्थित पश्चिम रेलवे वर्कशॉप क्षेत्र में 3 लाख लीटर क्षमता का एनारोबिक माइक्रोबियल इनोकुलम (बैक्टीरिया) प्रोजेक्ट स्थापित किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इससे बायो-टॉयलेट में इस्तेमाल होने वाले बैक्टीरिया की गुणवत्ता बनी रहेगी और समय पर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
वर्तमान में मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के शौचालयों में लगभग 120 लीटर क्षमता के बायो-डाइजेस्टर टैंक लगे हैं, जिनमें डीआरडीओ द्वारा विकसित विशेष एनारोबिक बैक्टीरिया का उपयोग किया जाता है। ये बैक्टीरिया 6 से 8 घंटे के भीतर मानव मल को पानी और गैस में परिवर्तित कर देते हैं, जिससे मल सीधे पटरियों पर नहीं गिरता।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बैक्टीरिया को दूर स्थानों से मंगाने के कारण उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है, जिससे कई बार ट्रेन गुजरने के बाद आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैलने की शिकायतें आती हैं। अब लोअर परेल वर्कशॉप में ही इनका उत्पादन होने से यह समस्या दूर होगी और खर्च में भी कमी आएगी। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने कहा कि यात्रियों की यात्रा गुणवत्ता में सुधार पश्चिम रेलवे की प्राथमिकता है। यह पहल ट्रेनों में जैव-शौचालयों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को भी मजबूती देगी।


