मुंबई (सं. भा.) अध्यात्म के क्षेत्र से राजनीति में प्रवेश करने वाली साध्वी प्रज्ञा के बयान को संत समाज ने अनुचित बताते हुए कहा है कि यह प्रज्ञा की व्यथा से छलका दर्द है. मुंबई के विभिन्न आश्रमों और मठो में जप तप करने वाले संत महात्माओ ने इस मुद्दे पर अपने मन की बात जाहिर की है.
व्यथा को समझना होगा
निश्चित रूप से वीरगति प्राप्त होने वाले सैनिको का अपमान सभ्य समाज में स्वीकार नहीं है. लेकिन पुलिस की कार्य प्रणाली आज किसी से छिपी नहीं है. साध्वी का बयान अनुचित तो है लेकिन भुक्तभोगी की वेदना को भी समझना होगा.-महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंदगिरि.
मात्र भावनात्मक प्रतिक्रिया
जीवन में किसी से भी पीड़ित और सताये जाने पर आम लोगों के मन में भी बददुआ निकलती है. इसी कड़ी में साध्वी के बयान को भी देखना होगा. यह एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है. माना कि उनका बयान उचित नहीं है लेकिन उनके दर्द को समझना होगा.-स्वामी स्वात्मबोधानंद अवधूत.
दबी भावनाओं का विस्फोट
साध्वी प्रज्ञा का बयान दबी भावनाओं का विस्फोट है. कुछ भी हो करकरे शहीद हुए हैं, उनका सम्मान होना चाहिए. लेकिन इसके निहितार्थ साध्वी के उस प्रताड़ना को भी समझना होगा जो उन्होंने अकारण झेला है. सरकार के इशारे पर पुलिस क्या कुछ नहीं करती है.-महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती.
सावधानी रखना जरूरी
जीवन में खट्टे मीठे अनुभव मनुष्य के साथ संत महात्मा को भी होते रहते हैं. लेकिन जब आप राजनीति में प्रवेश करते हैं तो बयान में सावधानी रखना जरूरी है. माना की उनके साथ पुलिस ने घोर अन्याय किया होगा लेकिन शहादत का अपमान नहीं होना चाहिए.-महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंदगिरी.


