मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 369 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के महंत स्वामी रामदास उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- मातु सरस्वती आइए ,मंच करो स्वीकार।
वाणी में रस छंद भर, करो नवल श्रृंगार।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- भारत का गणतंत्र पर्व यह सबको मंगलमय हो।
सभी कामनाएं हों पूरी, हर बाधा का क्षय हो।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – संतों की सेवा करो, हो परहित का काम।
अगर निज भला चाहते, जपो राम का नाम।।
दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- करें कुंभ स्नान सब, शुभ अवसर का योग।
जल्दी आएगा नहीं, यह दुर्लभ संयोग।।
शिव सागर साहू ने काव्य पाठ किया – जियें स्वदेश के लिए, मरें स्वदेश के लिए।
विपत्ति, विघ्न से न हम डरें स्वदेश के लिए।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – अधिकारों की बातें ज्यादा, कर्तव्यों की चर्चा कम।
इससे प्रगति नहीं होती है, पक्की बात समझ लें हम।।
विनय कुमार दीक्षित ने काव्यपाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार से शब्द दिए – आके दुनिया में लोगों पे उपकार कर ।
अपने सर पे तू पापों का बोझा न धर ।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- यह आजादी कितनों की ही कुर्बानी का प्रतिफल,
अमर शहीदों की थाती है, प्राणों से प्यारी है।
वलिदानी- दीवानों ने इस पर सर्वस्व लुटाया,
सींची गई लहू से इसकी पावन फुलवारी है ।।
कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।


