- व्यापारियों ने उठाए सवाल
मुंबई (सं. भा.)! देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन और सरकारी खरीद बढ़ने के बावजूद, केंद्र सरकार ने गुरुवार को व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं के लिए गेहूं के भंडारण पर एक बार फिर स्टॉक सीमा लागू करने का फैसला लिया है। इस पर व्यापारी हैरानी जता रहे हैं और इस फैसले की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। गेहूं की कीमतों को स्थिर रखने और घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं के लिए गेहूं पर भंडारण सीमा फिर से लागू कर दी है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, खुदरा विक्रेता केवल 10 टन गेहूं ही भंडारित कर सकेंगे। वर्ष 2024-25 में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमानों के बावजूद सरकार ने यह निर्णय लिया है। कृषि मंत्रालय ने गेहूं उत्पादन के अनुमान को बढ़ाकर 11.75 करोड़ टन कर दिया है, जो पिछले वर्ष के 11.32 करोड़ टन के आंकड़े से अधिक है।
व्यापारियों के महासंघ कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने सरकार के फैसले पर आश्चर्य जताते हुए कहा है कि सरकार रिकॉर्ड उत्पादन का दावा कर रही है, तो फिर खुदरा व्यापारियों पर स्टॉक सीमा की क्या आवश्यकता पड़ गई? महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने कहा कि हैरानी की बात है कि देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के बावजूद केंद्र सरकार को खरीद सीजन समाप्त होते ही गेहूं पर स्टॉक लिमिट लगानी पड़ी है। साथ ही, सरकार का फिलहाल गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध हटाने या 40% आयात शुल्क को कम करने का कोई इरादा नहीं दिखता है। ये नीतिगत फैसले देश में बंपर गेहूं उत्पादन के दावों पर सवाल खड़े करते हैं। इस फैसले के कारण छोटे और मझोले व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ के बिल्कुल विपरीत सरकार द्वारा किया जा रहा है। इसलिए खासकर खुदरा व्यापारियों के ऊपर से स्टॉक सीमा हटा देनी चाहिए।


