spot_img
Homeउत्तर प्रदेशउन्नाव में गूंजा 'या हुसैन' का मातम

उन्नाव में गूंजा ‘या हुसैन’ का मातम

हज़रत क़ासिम की मेहंदी का जुलूस श्रद्धा से निकला

उन्नाव(स भा)): मोहर्रम की तीसरी शब, उन्नाव शहर के मोहल्ला तालिब सराय में हज़रत क़ासिम की मेंहदी का पारंपरिक जुलूस गहरे मातमी माहौल में निकाला गया, जहां अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह जुलूस इस्लामिक महीने मोहर्रम की पवित्रता और त्याग के संदेश को एक बार फिर जीवंत कर गया।
रात के अंधेरे में जैसे ही जुलूस मोहल्ला तालिब सराय से निकला, या हुसैन की सदाएं गूंज उठीं। अंजुमन के सदस्यों ने हाथों में अलम उठाए, काले लिबास में सजे अकीदतमंदों के साथ गमगीन माहौल में मातम किया। हर कदम के साथ, हज़रत क़ासिम की शहादत को याद करते हुए नौहा खानी की गई, जिससे पूरा वातावरण शोक और श्रद्धा से भर उठा। यह जुलूस शहर के विभिन्न रास्तों से होकर गुज़रा, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए, जो इस पवित्र परंपरा का हिस्सा बनने के लिए उमड़ पड़े थे। जुलूस में शामिल लोगों ने अलम और ताबूत लेकर मातम किया, और नौहे पढ़ते हुए हज़रत क़ासिम की कुर्बानी को याद किया। यह सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें हज़रत क़ासिम की शहादत की याद में मेहंदी की रस्म अदा की जाती है, जो उनके विवाह से पहले की दुखद घटना का प्रतीक है।
इस पवित्र अवसर पर, पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहा, जिसने शांति और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता इंतज़ाम किए थे। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ, ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से भी निगरानी की गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। मोहल्ले के गणमान्य नागरिकों और धर्मगुरुओं ने भी प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर शांतिपूर्ण जुलूस संपन्न कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई।
अंजुमन के सक्रिय सदस्य मोहम्मद रईस ने बताया कि यह जुलूस न केवल मोहब्बत और कुर्बानी का प्रतीक है, बल्कि इसे पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ निकाला गया। उन्होंने जोर दिया कि मोहर्रम का यह महीना बलिदान, सब्र और इंसानियत का पैग़ाम देता है, जो हमें त्याग और धैर्य के महत्व को सिखाता है। यह जुलूस सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उन मूल्यों का स्मरण है जो इस्लामी इतिहास में निहित हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com