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मुंबई हाई कोर्ट से पीड़िता को मिली राहत

  • आरोपी पुलिस वाले को नही मिली जमानत

मुंबई (सं. भा.) : बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेप के मामले में दो वयस्कों के बीच रिश्तों की रजामंदी को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामले में शुरुआती सहमति व्यक्ति को निरंतर शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण का लाइसेंस नहीं देती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक पुलिसकर्मी की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए की है। जस्टिस एन. जे. जमादार ने कहा है कि जब रिश्ते में खटास आती है, तो आरोप तेजी से फैलते हैं, मगर मौजूदा केस के तथ्यों के मद्देनजर आरोपी को जमानत देना विक्टिम के हित और जांच को खतरे में डालने के समान होगा। प्रथम दृष्टया आरोपों से जुड़ी सामग्री विश्वसनीय नजर आ रही है, इसलिए आरोपी को राहत देने के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। पुलिस महकमे में कार्यरत विक्टिम ने आरोपी की धमकियों से तंग आकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोपी की हरकतों के चलते उसके घर में कलह शुरू हुई।

आरोपी ने नशीला पदार्थ और गोलियां देकर उसका यौन शोषण किया था। तलाक नहीं लेने पर उसके पति को जान से मारने की धमकी दी थी। आपत्तिजनक विडियो और फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसका लगातार यौन शोषण किया।

आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सामग्री’
सरकारी वकील ने कहा कि केस को विवाहेत्तर रिश्ते के नजरिए से नहीं देखा जा सकता है। आरोपी के हिंसक आचरण और धमकाने से जुड़ी पर्याप्त सामग्री है। उसने धमकाने के लिए हाथों में बंदूक लिए एक विडियो भेजा था।

विवाहेत्तर संबंध के नजरिए से देखा जाए’
केस में आरोपी का पक्ष रख रहे वकील ने कहा कि आरोपी और विक्टिम विवाहित हैं। यह रेप नहीं, दो वयस्कों के विवाहेत्तर संबंध का मामला है। दोनों पुलिस डिपार्टमेंट में हैं। दोनों में शुरू से रिश्ते रजामंदी से बने थे।

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