मुंबई (सं. भा.)। चिकित्सा विशेहज्ञों के अनुसार यदि भारत मे कोरोना के तीसरी लहर आती है तो इसका सबसे अधिक खतरा छोटे उम्र के बच्चों को हो सकता है। हलांकि दुसरी लहर मे ही कोरोना ने कोहराम मचाते हुए सबसे ज्यादा अपनी चपेट मे युवाओं को लिया है ऐसे मे तीसरी लहर को लेकर की जा रही भविष्यवाणी से लोगों के साथ प्रशासन भी सक्ते मे आ गया है। राज्य में कोरोना की तीसरी लहर में विशेषज्ञों ने छोटे बच्चों के संक्रमित होने के खतरे की आशंका जताई है, कोरोना की तीसरी लहर अगस्त के आखिरी अथवा सितंबर महीने के पहले सप्ताह में आ सकती है। इसी आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने १८ वर्ष से कम आयु के बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पेडियेट्रिक टास्कफोर्स बनाने का निर्णय लिया है। इसकी घोषणा स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने की है।

सरकार ने निपटने के लिए तैयारी शुरु की
टोपे ने कहा कि तीसरी लहर से पहले ही हमने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य में तत्काल प्रभाव से पेडियेट्रिक टास्क फोर्स बनाया जा रहा है, इस टास्क फोर्स में १८ वर्ष से कम आयु के कोरोना संक्रमित बच्चों के उपचार के लिए चाइल्ड विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी।
टोपे ने कहा कि १८ वर्ष से छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करना आवश्यक है। बच्चों के लिए जरुरी बेड, पेडियेट्रिक वेंटिलेटर, एनआईसीयू बेड जो भी आवश्यक होगा पहले से ही तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विशेहज्ञों से चर्चा की थी जिसमें विशेषज्ञों ने तीसरी लहर के दौरान बच्चों पर खतरे की आशंका व्यक्त की थी। इसलिए बच्चों की रक्षा के लिए अभी से सभी उपाय योजना तैयार की जा रही है।


