मुंबई (सं. भा): देवउठनी एकादशी का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि में शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। इसी उपलक्ष्य में भगवान विष्णु (शालिग्राम) और तुलसी माता का विवाह संपन्न कर भक्तजन धर्म, प्रेम और परंपरा का उत्सव मनाते हैं।
मुंबई और उपनगरों में रविवार को यह पर्व भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रभादेवी, परेल, चेंबूर, मुलुंड, कांदिवली, बोरीवली, ठाणे, कल्याण और नवी मुंबई में मंदिरों व सोसायटियों में महिलाओं ने तुलसी चौरा को फूलों, दीपों और रंगोली से सजाया। सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तुलसी और शालिग्राम का विवाह पारंपरिक रीति से हुआ।
कई स्थानों पर सामूहिक तुलसी विवाह भी आयोजित किए गए, जिनमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और आरती उतारी। मालाड निवासी बीना सिंह ठाकुर ने बताया कि इस बार एकादशी शनिवार को और उदया तिथि रविवार को होने के कारण उन्होंने दोनों दिन पूजा-अर्चना की।
आचार्य बालकृष्ण मिश्र ने कहा कि देवउठनी एकादशी के बाद ही विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है।
भक्तिमय माहौल में शहर की गलियां तुलसी विवाह के जयघोषों से गूंजती रहीं। दीपमालाओं की जगमगाहट और भक्तों की आस्था ने पूरे मुंबई को धार्मिक रंगों से सराबोर कर दिया।


