- मानसून से पहले नाला सफाई की धीमी रफ्तार चिंताजनक
वसई (सं. भा.) । वसई-विरार शहर में हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से जूझते नागरिकों के लिए इस बार भी राहत की खबर नहीं है। मानसून दस्तक देने में अब महज एक महीना ही शेष है, लेकिन महानगरपालिका (मनपा) द्वारा शुरू की गई नाला सफाई का काम कछुए की गति से चल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पूरे मनपा क्षेत्र में अब तक केवल 24 प्रतिशत नालों की ही सफाई हो पाई है, जिससे मानसून से पहले शेष कार्य पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण और विकास के नाम पर हो रहे अवैध निर्माण, मिट्टी भराव और प्राकृतिक नालों को बाधित करने के कारण वसई-विरार के निवासी पिछले कई वर्षों से बाढ़ की समस्या का सामना कर रहे हैं। हल्की बारिश में भी निचले इलाकों में पानी जमा हो जाता है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए मनपा ने मानसून से पहले शहर के 205 नालों, जिनकी कुल लंबाई 171 किलोमीटर है, की सफाई का कार्य 4 अप्रैल से शुरू किया था।
सफाई कार्य को तकनीकी रूप से करने के लिए मनपा ने 21 लंबी बूम उत्खनन मशीनें, 31 छोटी बूम उत्खनन मशीनें, 20 जेसीबी और कीचड़ परिवहन के लिए 25 डम्पर लगाए हैं। हालांकि, इन संसाधनों के बावजूद, प्रगति की रफ्तार धीमी है। मनपा उपायुक्त नानासाहेब कामठे ने बताया कि 205 नालों में से केवल 28 नालों की ही पूरी तरह सफाई हो पाई है, जबकि शेष नालों पर अभी भी काम जारी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नाले से निकाली गई सिल्ट को नाले से 15 मीटर दूर फेंका जा रहा है और जहां जगह उपलब्ध नहीं है, वहां से उसे तुरंत उठाया जा रहा है। मनपा का लक्ष्य 31 मई तक सफाई कार्य को पूरा करने का है, लेकिन मौजूदा गति को देखते हुए यह लक्ष्य काफी मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में, वसई-विरार के नागरिकों को इस मानसून भी जलभराव की समस्या से जूझना पड़ सकता है।


