मुंबई (सं.भा.) भविष्य में बढ़ती आबादी के साथ पेयजल की बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश पर बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए राज्य सरकार ने मुंबई की जल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। नगर विकास विभाग ने मुंबई महानगरपालिका की महत्वाकांक्षी समुद्र के पानी को मीठा बनाने (डीसेलिनेशन) परियोजना के लिए मालाड के मनोरी से कांदिवली के महावीर नगर तक जल सुरंग (वाटर टनल) निर्माण को पूर्व मंजूरी प्रदान कर दी है। मुंबई मनपा के अतिरिक्त आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर के प्रस्ताव पर सरकार ने शासनादेश जारी करते हुए परियोजना को हरी झंडी दी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था को नया आधार मिलेगा और शहर की बारिश पर निर्भरता काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
शासनादेश के अनुसार मनोरी से चारकोप स्थित मनपा उद्यान और वहां से कांदिवली के महावीर नगर तक भूमिगत जल सुरंग बनाई जाएगी। सरकार ने निर्देश दिया है कि सुरंग निर्माण के दौरान किसी भी इमारत या अन्य संरचना को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसके लिए पहले विस्तृत भूगर्भीय अध्ययन किया जाएगा और उसी के आधार पर उपयुक्त टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का चयन किया जाएगा। परियोजना शुरू करने से पहले केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सहित सभी संबंधित प्राधिकरणों से आवश्यक मंजूरियां लेना भी अनिवार्य होगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि मानसून के दौरान निर्माण कार्य से आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। जल सुरंग के परीक्षण, निरीक्षण और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी मुंबई महानगरपालिका की होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस परियोजना के निर्माण से राज्य सरकार पर किसी प्रकार का वित्तीय भार नहीं आएगा।
सरकार का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के आगमन में हो रही देरी और लगातार बढ़ती आबादी के चलते मुंबई में पेयजल की मांग लगातार बढ़ रही है। कई बार जून और जुलाई में जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण पानी की कटौती करनी पड़ती है। ऐसे में समुद्र के पानी को शुद्ध कर पेयजल के रूप में उपयोग करने की यह परियोजना भविष्य के जल संकट से निपटने की दिशा में अहम साबित होगी और शहर को वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराएगी।
परियोजना के तहत मनोरी में प्रतिदिन 20 करोड़ लीटर क्षमता वाला आधुनिक डीसेलिनेशन प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 14 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 20 वर्षों तक संयंत्र के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित ठेकेदार के पास रहेगी। महानगरपालिका को उम्मीद है कि परियोजना के पूरा होने के बाद मुंबई की पेयजल आपूर्ति अधिक मजबूत, टिकाऊ और मौसम पर कम निर्भर बनेगी, जिससे आने वाले वर्षों में बढ़ती जल मांग को पूरा करने में बड़ी राहत मिलेगी।


