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आग गणेश नगर को न कर दे खाक

मुंबई (राजन सिंह)। मुंबई इन दिनों आग के मुहाने पर ख़डी है। ऐसा एक दिन भी शायद नहीं जाता है जिस दिन शहर में अगजनी की छोटी-ब़डी घटना न घटित हुई हो। अगजनी के दौरान मुंबई में बसे झोप़डपट्टी क्षेत्र फायरब्रिगेड के जाबाजों के लिए सबसे ब़डा सिर दर्द बने है।

बता दें कि पिछले सप्ताह कांदिवली (प.), गणेश नगर के के. डी. कंपाउंड में बने साहिल सेवा सोसायटी में चलाए जाने वाला एक प्लास्टिक के कारखाने में अचानक लगी आग से वहां काम करने वाले दो सगे भाई बूरी तरह झुलस गए जबकि एक अन्य मामुली रुप से जल गया। इस हादसे में ब्रजमोहन चौधरी जहां ९० प्रतिशत तक जल गया है वहीं उसका भाई राधेमोहन चौधरी करीब ३० प्रतिशत तक जला है। राधेश्याम चौधरी इस आजनी के हादसे में मामुली रुप से झुलस गया जिसको इलाज के बाद असपताल से छुट्टी दे दी गई है। ऑस्कर हास्पिटल के डॉक्टर नितिन पवार का कहना है कि ब्रजमोहन का बचना बहुत ही मुश्किल है जबकि उसके भाई राधेमोहन का बचने की संभावना जताई है। अब सवाल यह उठता है कि झोप़डपट्टी क्षेत्र में ऐसे कारखाने किस के आर्शिवाद से चलाए जा रहे है। जानकारों की माने तो झोप़डपट्टी बनने के बाद कारखानों में तबदिल होने वाले गाले स्थानीत नेताओं, स्लम माफियाओं, मनपा अधिकारियों की मिली भगत और फायर ब्रिगेड के अधिकारियों की समय रहते अंदेखी का परिणाम है। इस संबंध मे अगर कोई शिकायत करता है तो स्थानीय नेता या नगरसेवकों के साथ जु़डे गुंडे तत्व साम, दाम, दंड, भेद के द्वारा इतना प्रता़डित कर देते है कि वह खुद समझ नही पाता कि जन समस्या को सुलझाए या अपनी समस्या को निपटाए।

गौरतलब है कि, संगठन भारत समय समय पर गणेश नगर में चलने वाले ऐसे कारखानों के बारे में खुलासा करता रहा है जहां आग लगने की संभावना बनी रहती है। के. डी. कंपाउंड में चलने वाले ऐसे सैक़डों कारखाने है जहां प्लास्टिक, फरसान, वाहनों के डुप्लिकेट पार्टस आदि बनाए जाते हैं। इन कारखानों में या तो ज्वलनशील केमिकल का उपयोग किया जाता है या गैस सिलेंडर का। यह इस बात को रंगित करता है कि गणेश नगर पूरी तरह आग के मुहाने पर इन दिनो है और कभी भी कोई ब़डा अग्जनी का हादसा होने पर यह पूरी तरह खाक मे तब्दिल हो सकता है। इस के लिए मनपा, फायरब्रिगेड के अधिकारियों को चाहिए की समय रहते कानूनी रुप से ऐसे कारखानों पर नकेल कस यहां रहने वाले आम लोगों की जान की जोखिम को कम करे। अक्सर देखा गया है कि कोई ब़डा हादसा होने के बाद मनपा अधिकारी जाग जाते है और मामला शांत होने के बाद उनका रवैया पहले जैसा ही हो जाता है। कौन झूठा, कौन सच्चा यह तो हमारे पाठक तय करें पर मनपा आर दक्षिण के अधिकारियों का कहना है कि जो लोग जनता के वोट से जनप्रतिनिधी बनते है वही जनता के दुख दर्द को भुल कर अपना जेब भरने मे जुट जाते है। अगर हम कार्रवाई करना भी चाहते है तो यही जनप्रतिनिधी उक्त कारखाना मालिक के पक्ष मे हम पर दबाव बनाते है।

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