रोता है कभी जब दिल अपना,
आँसू भी निकल ना पाते है।
बस याद दिलाकर वो अपनी,
दिन रात हमें तड़पाते है ।।
कुछ लमहें भी हैं याद मुझे,
जो मस्ती में संग जीये थे।
रह रहकर मुझको जाने क्यूँ,
वो पल अब हमें रिझाते हैं ।।
किस्मत का खेल अजूबा है,
कुछ पाया ज्यादा खोया हूँ।
इन चंद दिनों के जीवन में,
बस दर्द सदा हीं पाते हैं।।
ना खुशी मिली रोता हीं रहा,
हर मोड़ पे ठोकर खा खाकर।
मझधार में उसने छोड़ दिया,
रो रोकर समय बिताते हैं।।
गीतकार: रसियाकुमार


