कानपुर (सं. भा.)। एकजुटता से पार्टी प्रत्याशियों को जिताने का दंभ भर रहे सपाई टिकट वितरण शुरू होते ही बिखर गए। पैसे और सिफारिश से टिकट देने के गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यकर्ता आपा खो बैठे। आपस में मारपीट की, पार्टी का पोस्टर जला दिया। महानगर अध्यक्ष से अभद्रता कर पार्टीजनों ने वहां पहुंचे विधायक को भी उल्टे पांव लौटा दिया। प्रत्याशी तय होने के बाद भी सूची दबाए बैठे प्रभारी भीड़ और आक्रोश बढ़ने का मौका देते रहे और कार्यालय छोड़ इधर से उधर भागते रहे।
सपा ने महापौर प्रत्याशी का नाम तो पहले ही घोषित कर दिया, लेकिन पार्षद प्रत्याशियों की सूची को लेकर खींचतान मची रही। पहले से इस बात को लेकर नाराजगी फूटने लगी थी कि संगठन और विधायकों के बीच में चल रही खींचतान में मेहनती कार्यकर्ताओं का नुकसान हो सकता है। रविवार को ऐसी स्थिति सामने आ भी गई। चुनाव प्रभारी अताउर्रहमान नवीन मार्केट स्थित महानगर सपा कार्यालय के एक बंद कमरे में महापौर प्रत्याशी माया गुप्ता, महानगर अध्यक्ष फजल महमूद और कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी बैठे। प्रभारी ने एक साथ सूची घोषित करने से मना कर दिया। एक-एक कर विधानसभा वार प्रत्याशियों को बुलाकर सिंबल देना शुरू किया। बाहर तो सभी विधानसभाओं के वार्डो के दावेदार इकट्ठे थे। प्रत्याशियों का चयन देख कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी कि टिकटों में जोड़तोड़ चला है, कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। थोड़ी देर में विधायक इरफान सोलंकी वहां पहुंचे तो नाराज कार्यकर्ताओं ने उन्हें भी लौटा दिया। कुछ कार्यकर्ताओं ने महानगर अध्यक्ष फजल महमूद से भी अभद्रता कर दी। इसी बीच नवीन मार्केट में जमा कार्यकर्ताओं में कुछ बहस हुई और फिर एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। पार्टी का बैनर भी फूंक डाला।
मामला बिगड़ा तो प्रभारी अताउर्रहमान वहां से सूची दबाकर ग्रामीण कार्यालय में जा बैठे। वहां हंगामा हुआ तो किसी दूसरे ठिकाने जा बैठे, लेकिन पूरी सूची एक बार में सार्वजनिक नहीं की। एक-एक विधानसभा के प्रत्याशियों को बुला रहे थे, जिससे आक्रोश बढ़ता ही गया। स्थिति यह रही कि देर शाम तक दर्जनों दावेदारों को पता ही नहीं था कि उनका टिकट तय हुआ है या नहीं।
फूट-फूट रोयीं दावेदार, सुनाई खरी-खोटी
पूर्व पार्षद कीर्ति अग्निहोत्री इस बार महापौर प्रत्याशियों की कतार में प्रबल दावेदार थीं। वह पार्षदों के टिकट वितरण के दौरान कुछ महिलाओं के साथ जबरन कार्यालय में घुस गई। प्रभारी के सामने ही उन्होंने महापौर प्रत्याशी माया गुप्ता की ओर इशारा करते हुए कहा कि पार्टी के लिए काम हम जैसे कार्यकर्ता करें और टिकट ऐसी घरेलू महिला को दे दी। उन्होंने पैसों के लेन-देन के भी खुले आरोप लगाए। उसके बाद कार्यालय के बाहर रोते हुए उन्होंने बताया कि संगठन से कहा था कि मेयर नहीं तो पार्षद का टिकट दे देना, लेकिन वह भी काट दिया। अब जनता के सहयोग से निर्दलीय लड़ने का विचार कर रही हैं।


