उन्नाव (सं. भा.)। लखनऊ-कानपुर हाईवे पर सफर बेहद जोखिम भरा है। जागरूकता लाकर हादसों पर अंकुश लगाने का दावा कर रहे जिम्मेदार उन बड़ी वजहों को लेकर बेपरवाह हैं जो अक्सर हादसे का सबब बनती हैं। सड़क किनारे वाहनों की पार्किग और जगह-जगह डिवाइडर तोड़कर बनाए गए अवैध कट जान को जोखिम में डालते हैं। हालांकि, एनएचएआइ द्वारा इन अवैध कटों को कई बार चिह्नित कर कार्रवाई का दावा किया गया। लेकिन, जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्रवाई न होने पर बंद होने के बाद फिर यह कट बना दिए गए।
वर्तमान में हाईवे पर 62 अवैध कट हैं। जिनसे निकलने की कोशिश में वाहन सवार जान गवां बैठते हैं या गंभीर हादसों का शिकार हो जाते हैं। लाख कवायद के बाद भी ये अवैध कट बंद नहीं कराए जा सके। हादसों पर अंकुश पाने के लिए पुलिस ने यातायात माह में भी हादसों के मूल वजह को गंभीरता से नहीं लिया। हाईवे पर चिह्नित 62 अवैध कट ढाबों, पेट्रोल पंप समेत अन्य प्रतिष्ठानों के सामने बनाए गए हैं। साल भर के आंकड़े बताते है कि सर्वाधिक हादसे हाईवे पर ही हुए हैं। इस वर्ष भी हाईवे पर 200 से अधिक लोगों ने जान गंवाई, जिसमें अवैध कट से निकलने में मौतों की संख्या ज्यादा रही।
डिवाइडर को तोड़कर बनाए गए अवैध कट को बंद कराने के लिए एनएचएआइ और पुलिस ने कई बार योजना भी बनाई। दुकानदारों, होटल और पेट्रोल पंप संचालकों को नोटिस थमाने के साथ कार्रवाई की चेतावनी देकर शांत बैठ गए। कार्रवाई न होने से बंद कराए गए अवैध कट फिर से खोल दिए गए। हाईवे पर बनाए गए अवैध कट में नवाबगंज सरस्वती मेडिकल कालेज के सामने, सेरसा जाने वाले मार्ग पर, मिश्रीगंज के पास, रिलायंस और जीआरओ पेट्रोल पंप के सामने, मुर्तजानगर नहर के पास, बसीरतगंज के पास, आशाखेड़ा के पास, बजेहरा के पास, गदनखेड़ा के पास, शिव सिंह खेड़ा के पास और इसके बाद आजाद मार्ग से जाजमऊ तक कई अवैध कट बनाए गए हैं।
क्या बोले जिम्मेदार
एनएचएआइ के परियोजना निदेशक पी शिवशंकर ने बताया कि कई बार यह अवैध कट बंद कराए गए, इसके बावजूद ज्यादातर ढाबा और पेट्रोल पंप संचालक इन्हें खोल लेते हैं। जल्द ही अभियान चलाकर इन्हें बंद कराया जाएगा, इसके बाद कोई कट मिला तो उसके आमने-सामने के पेट्रोल पंप, ढाबा या अन्य प्रतिष्ठानों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।


