मुंबई (सं. भा.)। बम्बई उच्च न्यायालय ने कहा है कि लोगों द्वारा किसी डेवलपर या बिल्डर के खिलाफ दायर की गई शिकायत को ‘दीवानी मामला’ न समझा जाए और पुलिस ऐसे मामलों की तत्परता से जांच करे। न्यायमूर्ति शाहरुख कथावाला ने पिछले हपÌते दिये अपने आदेश में कहा था कि पुलिस को इन शिकायतों को दीवानी मामला बताकर अपनी जिम्मेदारियों से दूर नहीं भागना चाहिए। उपनगरीय मालाड में स्थित लिबर्टी गार्डेन को –
ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी द्वारा दायर की गयी एक याचिका पर उच्च न्यायालय ने अपना आदेश दिया था। उस याचिका में आरोप लगाया था कि कई आश्वासनों के बावजूद डेवलपर कंपनी केटी ग्रुप ने सोसाइटी के पुननिर्माण कार्य को पूरा नहीं किया।
उच्च न्यायालय का निर्देश
याचिका के मुताबिक, सोसाइटी के पुनर्निर्माण के लिए सोसाइटी का दिसंबर २०१३ में इस डेवलपर कंपनी के साझेदार धैर्य सेठ, संदीप सेठ और ध्रुव सेठ के साथ एक समझौता हुआ था। जनवरी २०१५ में केटी ग्रुप ने इस परियोजना के लिए काम शुरु करने संबंधी प्रमाणपत्र जारी किया था, जिसमें वह इस काम को २८ महीने से पहले पूरा करने पर सहमत हुआ था।
यह डेवलपर कंपनी इस परियोजना को निर्धारित अवधि के भीतर पूरा नहीं कर पायी और अप्रैल २०१७ के बाद से विलंब के लिए सोसाइटी के सदस्यों को मुआवजा राशि देने से भी मना कर दिया। सितंबर २०१७ में, सोसाइटी ने उपनगरीय मालाड पुलिस के पास उक्त डेवलपर के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करायी, हालांकि, मालाड पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक ने कहा था कि यह विवाद दीवानी मामला है, जिससे असंतुष्ट होकर सोसाइटी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखाया था। अदालत ने शहर के पुलिस आयुक्त को इस पूरे मामले की जांच करने और इस दिशा में आवश्यक व उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है।


