मुंबई (संवाददाता) मुंबई अगर भ्रष्टाचार का खुला खेल हो रहा है तो वह है कांदिवली पश्चिम, गांधीनगर में होनेवाली झोपड़पट्टी विकास पुनर्वसन योजना| एसआरए,कलेक्टर कार्यालय से लेकर विकास नियोजन में लगी जयहिंद गांधीनगर सहकारी गृहनिर्माण संस्था (नियोजित), सोसायटी के पदाधिकारी और जुगाड़बाज नेता सब के सब बिल्डरों के नोटों के बंडल पर ताताथैया करने पर मजबूर है| आम जनता के हित के नाम पर बनी झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना भ्रष्टाचार में डूबी नजर आ रही है| इलाके के राजनीतिकबाज,गली के पहरेदार, सोसायटी के लोग के कारनामें जग जाहिर हो चले है| इलाके में सब मिलकर एसआरए स्कीम के नाम पर जमकर श्रीखंड खा रहे है| नतीजा यह है कि उन्होने स्कीम को विवादित बना दिया है|
आज यहां बिल्डरों से गाड़ी,मोटर,बंगला, मोटी रकम पाने की होड़ लगी है| बिल्डरों से किस तरह पैसे हाशिल हो लोग जुगाड़ में है| प्रतिस्पर्धा इसलिए है कि स्कीम में बिचौलिया का काम करने वाले कुछ लोग अपने भविष्य को बना लिया है| मिले पैसे से राजनीतिक और आर्थिक सेहत सुधारे है| साफ-सुथरा होने का नाटक दिखाने वालों का पोल जनता खोलने लगी है| सबसे ज्यदा किरकिरी भाजपा के नगर सेवक कमलेश यादव की हो रही है| बिल्डरों की बाजार लगाने में उनकी अहम् भूमिका जन चर्चा में है| कभी रविग्रुप के लिए काम करने वाले कमलेश यादव आज अमित रुपारेल रिएलटी का काम कर रहे है| स्थानीय लोगों के बात पर विश्वास किया जाए तो कमलेश यादव के अलावा और कई लोग है जो एक बिल्डर से दूसरे बिल्डर की ओर पलटी मार कर आलीशान फ्लैट के मालिक बन गए| सच है कि कमलेश यादव भले बदनाम हो रहे पर पर्दे के पीछे रहकर और भी चेहरे भरपूर लाभ ले रहे है| अमित रुपारेल के यहां से भी कमलेश यादव के पर कुतरने का भीतरघात उनके प्रतिस्पर्धी कर रहे है ताकि माल उनकी झोली में गिरे| रविग्रुप से वर्षों तक माल कमाने वाले का रुख अमित रुपारेल की तरफ है| बताया जाता है कि अमित रुपारेल पानी की तरह पैसा बहा रहा है| मीटिंग लगाने के नाम पर लाखों रुपये का वारा-न्यारा हो रहा है| सोसायटियों के खब्बू पदाधिकारियों की बहार आ गई है| बात यहां विकास का कोई नहीं कर रहा है सिर्फ मोटी रकम ऐठने का जंग जारी है| यहां जनप्रतिनिधियों समेत कई लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप में बिल्डर के लिए ताल ठोकते नजर आ रहे है| रहिवासी जागे पर उन्हें पटाने का भी काम चालाकी से किया जा रहा है ताकि विद्रोह शांत हो जाए| वर्षों से झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना का काम जारी है पर नतीजा लाने के बदले सोसायटी के लोग उलझा दे रहे है|जयहिंद गांधीनगर गृहनिर्माण संस्था के अंतर्गत १८२३ झोपड़ों की स्कीम को २३०४ झोपड़ों का बना दिया गया है जिसको लेकर हंगामा है| कभी काम रोकने की शिकायत विभागों में देगे तो कभी मुनाफे के लालच में बिल्डर बदली करते है | अगर सोसायटी के लोग ईमानदार होते तो यहां किसी की दाल न गलती| स्कीम की कमाई से विधायक बना संगमलाल गुप्ता स्कीम का सौदा न कर पता | रहिवासी भी यही समझदारी पहले दिखाते तो आज वे बिल्डिंग में रहते है| चलो जभी जागो तभी सबेरा|


