सुलतानपुर (सं. भा.) : रेलवे विभाग में एनओसी देगी तो गोमती को निर्मल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ जाएगा। नालों के प्रदूषित पानी का प्राकृतिक ढंग से शोधित करने के लिए ऑक्सीकरण तालाब के निर्माण के लिए जिस जमीन को चिन्हित किया गया है उसका कुछ अंश रेलवे परिक्षेत्र में आ रहा है। सुलतानपुर-लखनऊ रेलखंड के निकट गभड़िया रेल पुल के नजदीक नालों के पानी को ऑक्सीकरण तालाब में एकत्र किया जाएगा। इसमें प्रदूषित पानी को शुद्ध करने के बाद गोमती में छोड़ा जाएगा। भूमि को रेलवे विभाग से मुक्त कराने के लिए जल निगम ने लिखा-पढ़ी की है।
आदि गंगा गोमती को पूरे बहाव क्षेत्र में स्वच्छ करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण इकाई लखनऊ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीते अक्टूबर में सरकार ने सुलतानपुर क्षेत्र में प्रवाहित तकरीबन 72 किमी गोमती को निर्मल करने के लिए 68 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की। इस धनराशि से नदी को निर्मल करने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। गोमती को प्राथमिक स्तर पर प्रदूषण से बचाने के लिए ऑक्सीकरण तालाबों के निर्माण और नालों को प्राकृतिक ढंग से स्वच्छ करने के लिए पौधरोपण को प्राथमिकता दी है। नालों पर स्थापित एसटीपी क्षमता कम होने के चलते निष्क्रिय हैं। अब आबादी बढ़ने और नालों के किनारों तक रिहायशी क्षेत्र होने से यह पानी बेहद दूषित हो गया है और सीधे नदी में गिरता है। जल निगम ने गभड़िया नाला पर रेलपुल के उत्तरी छोर पर नाले का पानी इकट्ठा किया जाएगा। वहां उसे ऑक्सीकरण तालाब में रसायनिक प्रक्रिया से साफ किया जाएगा। तालाब की तलहटी का गंदगी एकत्रित कर ऊपरी बहाव के साथ नाले का पानी नदी में प्रवाहित होगा। जल निगम के अधिशासी अभियंता आरएस यादव ने कहा कि नियंत्रण इकाई से हरी झंडी मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।


