मुंबई (सं. भा.) राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों को अब इसका हिसाब रखना होगा कि उन्होंने कितने मरीजों का इलाज किया है। मेडिकल एजुकेशन विभाग की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, निजी प्रैक्टिसिंग या फिर ओटी से नदारद रहने वाले सरकारी डॉक्टरों पर अंकुश लग जाएगा। मरीजों को बेहतर सुविधा मिलने और मेडिकल स्टूडेंट्स को सीनियर्स का प्रॉपर गाइडेंस मिले, इसलिए अस्पतालों के परफॉर्मेंस को मॉनिटर करने का काम किया जा रहा है।
राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में दी जानेवाली सुविधाओं की गुणवत्ता में और सुधार हो, इसको लेकर मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च काफी प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में अस्पतालों की परफॉर्मेंस को मॉनिटर करने के लिए डीएमईआर ने 15 मई 2023 को स्पेशल मॉनिटरिंग एंड एनालिटिक सेल बनाई। इस सेल का काम अस्पतालों के परफॉर्मेंस पर नजर बनाए रखना है। अस्पताल के परफॉर्मेंस के आधार पर ग्रेडिंग भी की जाएगी। इसी कड़ी में हाल ही में एक विडियो कान्फ्रेंस के जरिए सभी अस्पताल के डीन के साथ एक बैठक ली गई, जिसमें डीएमईआर के आला अधिकारी भी मौजूद थे। डीएमईआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस बैठक में मेडिकल कॉलेज के प्रफेसर, एसोसिएट प्रफेसर, सीनियर रेसिडेंट और जूनियर रेसिडेंट प्रत्येक ने कितनी सर्जरी की हैं, इसका ब्यौरा हर महीने स्पेशल मॉनिटर सेल को देना होगा। इससे प्रत्येक परफॉर्मेंस के बारे में पता चलेगा।

साफ-सफाई पर जोर
साफ-सफाई नहीं होने को लेकर सरकारी अस्पताल अक्सर आलोचना झेलते हैं। इसी के मद्देनजर सभी डीन को यह निर्देश दिया गया है कि साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना है। अस्पताल में साफ-सफाई और स्वच्छता के फोटो ग्रुप में वाट्सऐप ग्रुप में अपलोड करना है।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस जरूरी
अस्पताल को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मेडिकल कॉलेज के सभी फैकल्टी को बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य है। इसी के साथ अब सीनियर रेसिडेंट और जूनियर रेसिडेंट को भी बायोमेट्रिक के लिए एनरोल करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।


