– तोड़क कार्रवाई की नोटिस से व्यथित गोपाल शेट्टी का एलान- “केतकीपाड़ा की जनता की लड़ाई अब मेरी लड़ाई है,आखिरी दम तक लड़ूंगा! “
बोरीवली (सं. भा.) : संजय गांधी नेशनल पार्क की सीमा से सटे दहिसर के केतकीपाड़ा में छोटे मोटे व्यवसाय कर किसी तरह जीवनयापन कर रहे लोगों के व्यवसाय स्थल को तोड़कर जमींदोज करने की वन विभाग की नोटिस के बाद केतकीपाड़ा के लोगों का दर्द छलका तो ‘आखिरी उम्मीद’ लिए भारी संख्या में यहां के लोगों ने उत्तर मुम्बई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी के कार्यालय पहुंचकर बचा लेने की गुहार लगाई। उनके सिर पर वन विभाग की तोड़क कार्रवाई की लटकती तलवार देखकर व्यथित हुए जनसेवक गोपाल शेट्टी ने केतकीपाड़ा के लोगों से वादा किया है कि अब उनकी लड़ाई वे खुद लड़ेंगे और उसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेंगे।
इस संदर्भ में जनसेवक गोपाल शेट्टी का कहना है कि वर्ष 1997 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के उपरांत यहां वन विभाग की जमीन पर बने सभी कमर्शियल (व्यावसायिक ) स्ट्रक्चर्स पहले ही तोड़े जा चुके हैं। जिसे अब लगभग 27 साल बीत भी चुके हैं। माननीय सर्वोच्च अदालत के आदेश का हम सम्मान करते हैं। पर केतकीपाड़ा के मामले में स्पष्ट कर दूं कि यहां के व्यावसायिक स्थल कामर्शियल नहीं बल्कि सेमी-कामर्शियल हैं। वन विभाग के तथा अन्य संबंधित अधिकारियों ने पूरी बात माननीय अदालत के समक्ष तब रखी ही नहीं थी। ऐसे में पूरा मामला उलझ गया।
जनसेवक गोपाल शेट्टी के अनुसार जिस समय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी राष्ट्रपति बनीं उसी दौरान प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी जी ने एक कानून ही पास करा दिया था जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि वन विभाग में बने स्ट्रक्चर्स तब तक नहीं तोड़े जाएंगे जब तक वहां के लोगों को पर्यायी जगह नहीं उपलब्ध कराई जाए। ऐसे कानून के रहते केतकीपाड़ा में सेमी कामर्शियल 100-50 फीट में व्यवसाय करनेवालों को कामर्शियल प्रतिष्ठानों के रूप में देखना ठीक नहीं है। तकनीकी रूप से इन्हें कामर्शियल मान भी लें तब भी इनके लिए पर्यायी व्यवस्था भी मोदी जी द्वारा बनवाये गए कानून अंतर्गत करनी आवश्यक है।

जनसेवक शेट्टी के अनुसार 1997 से लेकर अबतक विभिन्न सरकारें आईं पर केतकीपाड़ा के लोगों को पर्यायी जगह देने के संदर्भ में किसी ने कोई कदम नहीं उठाया। इसमें केतकीपाड़ा के लोगों का क्या दोष है।
केतकीपाड़ा के लोग सरकारी जमीन पर बसे हैं या नहीं इसके लिए वन विभाग सर्वे भी कराकर यह भी निर्धारित करे कि वन विभाग की सीमा कहाँ तक है और केतकीपाड़ा का कितना हिस्सा वन विभाग की जमीन पर बसा है।
मीडिया से बात करते हुए जनसेवक शेट्टी ने आगे कहा कि केतकीपाड़ा और अन्य इलाकों के सर्वे कराने का वे प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और वन विभाग के अधिकारियों की एक ज्वाइंट मीटिंग के प्रयास में हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि “केतकीपाड़ा के लोगों का दर्द मैं समझता हूँ , इसलिए उनका पूरा साथ देते हुए योग्य कदम उठाऊंगा और उन्हें न्याय दिलाकर ही दम लूंगा ।’


