मुंबई (सं.भा.): मुंबई में आए दिन आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था में कोई ठोस सख्ती नजर नहीं आ रही। इसी लापरवाह माहौल के बीच बीते हफ्ते गोरेगांव (पश्चिम) के भगत सिंह नगर में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया, जहां आग लगने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।
इस हादसे में संजोग पावसकर (48), उनकी बेटी हर्षदा (14) और बेटा कुशल (12) की जान चली गई। आग बीते हफ्ते तड़के करीब 2:30 से 3 बजे के बीच लगी, जब तीनों घर की ऊपरी मंजिल पर सो रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फ्रिज में हुए शॉर्ट सर्किट से आग भड़की, जिसने कुछ ही पलों में पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। तेज लपटों और घने धुएं के कारण परिवार को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। संजोग पावसकर की पत्नी शबनम उस समय नाइट ड्यूटी पर थीं, जबकि उनकी बड़ी बेटी दिव्या पड़ोसी के घर सो रही थी, जिससे दोनों की जान बच गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने बाल्टियों से आग बुझाने की कोशिश की और दमकल विभाग को सूचित किया। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों ने बिजली आपूर्ति काटकर आग पर काबू पाया और घर के अंदर फंसे तीनों लोगों को बाहर निकालकर गोरेगांव ट्रॉमा केयर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चॉल और घनी आबादी वाले इलाकों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बार-बार हो रहे ऐसे हादसों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर जांच और रोकथाम की प्रक्रिया ढीली बनी हुई है, जिसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।


