मुंबई (सं. भा.)। वर्तमान जीवन की भागमभाग मे किसी के पास भी अपने स्वास्थ्य के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है। जिसके कारण लोगों मे सास संबंधी बीमारियां अधिक हो रही है। सड़को पर दौड़ती बेहिसाब गाड़ियां और उनके इंजन से निकलता जहरीजा धुआ सिगरेट के भी धुएं से ज्यादा खतरनाक हो गया है। अनियमित जीवनशैली, धुम्रपान, प्रदूषण के कारण लोगों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियां बढ़ती जा रही है। देश में सीओपीडी के ५५ मिलियन से ज्यादा मरीज है। यदि स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया तो आपका फेपड़ा फेल हो सकता है।
सीओपीडी का खतरा अधिक
कांदिवली पश्चिम के ओल्ड लिंक रोड स्थित ऑस्कर अस्पताल के ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज के. बांग ने कहा कि रिस्क फैक्टर्स जैसे धुम्रपान, औद्योगिक धुएं का एक्सपोजर, चूल्हे के लंबे समय तक उपयोग से सीओपीडी की समस्या हो सकती है। जिसे लोग फेफड़ों के अटैक के रुप में जानते हैं। फेफड़ों के अटैक की आवृत्ति इन्हेलर्स के नियमित उपयोग द्वारा कम की जा सकती है।

धुम्रपान, जीवनशैली बढ़ा रही समस्या
इन्हेलर एवं इसका डीलीवरी सिस्टम रोज बढ़ते सीओपीडी मरीजों की संख्या को देखते हुए पिछले सालों में विकसित हुआ है। गंभीर अटैक की स्थिति में मरीज को अस्पताल मे भर्ती कराना पड़ता है, लेकिन मौजूदा प्रगति के साथ बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए काफी कुछ किया जा सकता है। गोदरेज अस्पताल की टीबी एवं चेस्ट मेडिसन डॉ. तेजल शाह ने कहा कि लोगों में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण होने के बावजूद आम जनता को सीओपीडी के बारे में बहुत कम जानकारी है।
उन्होंने कहा,’ फेफड़ों के अटैक के बाद जब तक मरीज मेरे पास आता है, तब उसके फेफड़े बहुत ज्यादा क्षतिग्रस्त हो चुके होते हैं, समय पर निदान से न केवल बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलती है, बल्कि मरीज एवं देखभाल करने वालों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। उन्होंने कहा कि फेफड़ों का चेक-अप, जैसे बीपी एवं शुगर चेक हमारे देश की आम जनता को ध्यान मे रखना चाहिए।


