देश की गरिमा में देखो क्या है तेरे योगदान!
हम हमेशा ही कहेंगे जय जवान और जय किसान!!
मेरे हर कदमों में देखो याद आते तेरे काम!
रात को सोते हम भूखे तू ना होता जो किसान!!
गरिमा तेरी घट रही है घट रहा अब तेरा नाम!
हम हमेशा ही कहेंगे जय जवान और जय किसान!!
भू धरा और यह प्रकृति अब दे रही संदेश ये!
बढ़ रहा खतरा है देखो, कोई ना अब ध्यान दें!!
तेरे सारे काम भूले देख तू अब रे किसान!
हम हमेशा ही कहेंगे जय जवान और जय किसान!!
मेरा यह संदेश देखो सब को सुनना चाहिए!
देके मौका फिर से उनको बात उनकी मानिए!!
हम हैं उनसे वह ना हमसे,बात समझो यह जरा!
क्यों ना समझे, उनकी पीड़ा देखो कैसे वह मरा!!
धूप बादल हो या आंधी चलता देखो है किसान!
हम हमेशा ही कहेंगे जय जवान और जय किसान!!
लेखक अभिषेक त्रिपाठी


