- बाहर होती है कालाबाजारी
वसई (सं. भा.) : वसई-विरार में महावितरण कंपनी के पास मीटर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसा विभाग का कहना है, लेकिन मीटर बाहर ब्लैक में आसानी से मिल रहे हैं। साढ़े 8 सौ के मीटर के लिए लोगों को तीन हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि जब मीटर बाहर दुकानों में मिल सकता है, तो महावितरण के पास क्यों नहीं? इस कालाबाजारी से नागरिकों में भारी नाराजगी है।
वसई-विरार में महावितरण कंपनी (एमएसईबी) के पास बिजली के मीटर नहीं है। मीटर न होने की वजह से न तो खराब मीटर बदले जा रहे हैं, न ही नए बिजली कनेक्शन मिल रहे हैं। लोग नए मीटर के लिए बिजली विभाग के ऑफिस के चक्कर काटकर थक गए हैं। विभाग का कहना है, जब मीटर आएंगे तो मिल जाएंगे। वहीं, मीटर बाहर दुकानों में ब्लैक में आसानी से मिल रहे हैं। नालासोपारा लिंक रोड की रहने वाली रंजीता मिश्रा ने कहा कि कुछ दिन पहले उनका मीटर शॉर्ट सर्किट से जल गया। दूसरे दिन वह महावितरण वसई कार्यालय में गई। वहां मौजूद अधिकारी ने उनका बिल मांगा और कहा कि हमारे पास अभी मीटर उपलब्ध नहीं है, 10 से 12 दिन बाद आएगा। इस पर मिश्रा ने कहा कि 10 दिन तक क्या हमारा परिवार बिना बिजली के रहेगा? इस पर अधिकारी ने कहा कि आप बाहर से मीटर खरीदकर लगा सकते हैं। दूसरे दिन मिश्रा एक दुकान में गई और वहां मीटर के दाम पूछे, तो उसने तीन हजार रुपये बताए । इमर्जेंसी में मिश्रा ने मीटर लिया और लगवा दिया। मिश्रा का आरोप है कि इसमें महावितरण कंपनी और दुकानदारों की साझेदारी है। महावितरण कंपनी एक महीने का बिल नहीं भरने पर बिजली काट देते हैं। इस संबंध में वसई डिविजन के मुख्य अधीक्षक अभियंता संजय खंदारे ने कहा कि हमारे पास मीटर उपलब्ध हैं।


