मुंबई (सं. भा.) – महानगर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बीएमसी प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कोयले और लकड़ी से चलने वाली तंदूर भट्टियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। बीएमसी ने इस दिशा में कड़ा रुख अपनाते हुए होटल, बेकरी, ढाबा और रेस्तरां मालिकों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि यदि नियमों की अनदेखी की गई, तो जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। अब तक 84 प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजा जा चुका है, और उन्हें 8 जुलाई तक हरित ईंधन अपनाने का समय दिया गया है।
शहर में कोयले से पकाई गई तंदूरी रोटी, भाकरी, चपाती, पूरी, बटर नान और अन्य खाद्य पदार्थों का स्वाद अब लोगों को नहीं मिल पाएगा। बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए अब रसोई में कोयले के तंदूर की जगह बिजली, सीएनजी, पीएनजी या एलपीजी का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के पीछे मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है, क्योंकि कोयले और लकड़ी से चलने वाली भट्टियों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। बांबे हाई कोर्ट के 9 जनवरी के आदेश के तहत बीएमसी ने यह सख्त कदम उठाया है, जिसमें साफ कहा गया है कि बीएमसी की सीमा में अब किसी भी होटल, ढाबे, रेस्तरां या बेकरी में कोयले या लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
होटल और ढाबा संचालकों के लिए यह आदेश बदलाव की चुनौती लेकर आया है। वर्षों से कोयले पर आधारित तंदूर में पकाई जाने वाली रोटियां और अन्य व्यंजन मुंबईकरों की खास पसंद रही हैं। लेकिन अब शहर में प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए इन पर रोक लगा दी गई है। बीएमसी ने चेतावनी दी है कि 8 जुलाई तक यदि किसी भी स्थान पर कोयले या लकड़ी का उपयोग जारी मिला, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण की इस मुहिम में बीएमसी ने धोबीघाट की भट्टियों पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। अब यहां भी कपड़े सुखाने और प्रेस करने के लिए पारंपरिक ईंधन की जगह सीएनजी, पीएनजी या बिजली से चलने वाले उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।
इस फैसले के बाद जहां पर्यावरणविदों ने राहत की सांस ली है, वहीं होटल और ढाबा मालिकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि कोयले पर पकाई गई रोटियों का स्वाद बिजली या गैस आधारित तंदूर में नहीं आ सकता। एक ढाबा मालिक ने कहा, “हम तो नियमों का पालन करेंगे, लेकिन ग्राहकों को वही स्वाद देना अब मुश्किल होगा।”
मुंबई जैसे महानगर में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। खासकर सर्दियों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीएमसी का यह कदम शहर की हवा को शुद्ध करने में कारगर साबित हो सकता है।
अब देखना यह है कि क्या 8 जुलाई तक सभी होटल, ढाबे और रेस्तरां इस आदेश का पालन कर पाते हैं या नहीं। बीएमसी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस आदेश की अवहेलना करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।


