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किसानों के ‘भारत बंद’ को एनसीपी का समर्थन, शरद पवार पर भाजपा का हमला

मुंबई (सं. भा.) केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर किसान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच आज ८ दिसंबर को किसानों ने ‘भारत बंद’ का अव्हान किया है। महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार की प्रमुख घटक दल एनसीपी ने किसानों के भारत बंद को अपना समर्थन दिया है। उसी के बाद से राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके खिलाफ हमलावार हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शरद पवार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब पवार केंद्रीय कृषि मंत्री थे तब उन्होंने खुद सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था। मार्केट इंफ़्रास्ट्रक्चर में निजी क्षेत्र की भागीदारी की सही ठहराते हुए उन्होंने लिखा था कि मंदी एक्ट में बदलाव जरुरी है और इससे किसानों को कही भी अपनी फसल बेचन का असर मिल सकेगा।

रविशंकर ने आगे कहा, ‘आज जो हमने काम किया है,8-9 साल पहले मनमोहन सिंह जी की सरकार ये कर रही थी, 2005 में शरद पवार ये बोल रहे थे। जिस समय शरद पवार ये बोल रहे थे कि अगर आप सुधार नहीं करोगे तो हम वित्तीय समर्थन देना बंद कर देंगे। उस समय मनमोहन सिंह जी की सरकार का समर्थन सपा, RJD, CPI और अन्य दल कर रहे थे।’

क्या है पूरा मामला?
बता दें कि सरकारी सूत्रों ने बताया था कि यूपीए सरकार में बतौर कृषि मंत्री शरद पवार ने एपीएमसी ऐक्ट में बदलाव की मांग की थी ताकि निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिल सके। सूत्रों का कहना था कि अब जब यही मोदी सरकार कर रही है तो पवार इसका विरोध कर रहे हैं। अब इस पर एनसीपी का कहना है कि जिसमें संशोधन के लिए कहा था वह 2003 में वाजपेयी सरकार का ही लाया गया कानून था।

शरद पवार की चिट्ठी पर एनसीपी सफाई
एनसीपी के अनुसार, तब उसे लागू करने से राज्य सरकारें कतरा रही थीं इसलिए जब पवार कृषि मंत्री बने तो इन्होंने कृषि बोर्डों से कानून पर आम सहमति बनाने के लिए सुझाव मांगे थे और फिर उसे राज्य सरकारों के समक्ष रखा था। इसके बाद कई राज्य कानून को लागू करने के लिए आगे आए थे।

एनसीपी प्रवक्ता ने कहा कि आदर्श APMC कानून 2003 को वाजपेयी सरकार लेकर आई थी। हालांकि कई राज्य उस वक्त इसे लागू करने के मूड में नहीं थे। एनसीपी ने आगे कहा, ‘यूपीए सरकार में कृषि मंत्री के रूप में पवार ने ऐक्ट के कार्यान्वयन के लिए सुझाव आमंत्रित करके राज्य कृषि विपणन बोर्डों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की थी।’

किसानों के भारत बंद को शिवसेना का समर्थन

मुंबई (सं. भा.)। कृषि कानून बिल के विरोध कर रहे किसानों का कांग्रेस पार्टी शुरु से ही समर्थन कर रही है और केंद्र सरकार के खिलाफ इस कानून को लेकर हमलावार रुख अपनाए हुए है। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार मे कांग्रेस के साथ शामिल एनसीपी और अब शिवसेना ने भी किसानों द्वारा आज ८ दिसंबर को किया गया ‘भारत बंद’ के अव्हान को अपना अपना समर्थन दे दिया है।

पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसान देश का देश का अन्नदाता है और देश की जनता को भी इस आंदोलन में हिस्सा लेना चाहिए। राउत ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘देश के किसानों द्वारा पुकारे गए राष्ट्रव्यापी बंद को शिवसेना का समर्थन! किसान अन्नदाता हैं,इसलिए उनके प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी के नाते देश की जनता को भी किसानों के बंद में स्वेच्छा से हिस्सा लेना चाहिए।शिवसेना किसानों की मांगों और 8 दिसंबर के भारत बंद में उनके साथ है।

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