- चाय की दुकानों और गलियारों में जीत-हार पर चर्चा
- अपने अपने तर्क से जीत-हार का अंक गणित समझा रहे है कार्यकर्ता
- चुनाव नतीजों के बाद शुरु होगी विधानसभा चुनाव की कवायद
मुंबई (सं. भा.)। लोकसभा चुनाव के अबतक के इतिहास में सबसे लंबी चुनावी प्रक्रिया के ६ चरण पुरे हो चुके है। अब मतदान का ७ वां और अंतिम चरण १ जून को पुरा होगा। हालांकि अंतिम चरण के चुनाव प्रचार की गर्मी उफान पर है, लेकिन पिछले ६ चरणों में जहां-जहां चुनाव संपन्न हो गए है, वहां-वहां अब हार-जीत के नतीजे पर चर्चाओंका बाजार गर्म है। गली-मुहल्ले से लेकर चाय-पान की दुकानों पर जीत-हार के फार्मुले गढ़े जा रहे है। मुंबई में पाचवें चरण के तहत २० मई को मतदान हुआ था। यहां कि सभी ६ लोकसभा सीटों पर महायुति और महा विकास आघाड़ी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है, जबकि प्रकाश आंबेडकर कि वंचित आघाड़ी किसी ना किसी का खेल बिगाड़ने में लगी हुई है। जिस तरह से महाविकास आघाड़ी ने प्रकाश आंबेडकर को अपने साथ रखने के लिए काफी दिनों तक लटकाकर रखा और बाद में उन्हें नजरअंदाज कर दिया उससे नाराज होकर प्रकाश आंबेडकर ने मुंबई के सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। अब इसका कितना नफा-नुकसान किसको होगा यह तो चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलेगा, लेकिन चर्चा है कि वंचित आघाड़ी, महाविकास आघाड़ी की गाड़ी बिगाड़ने का काम करेगी। जिस तरह से मुंबई में चुनाव प्रचार हुए सभी पार्टियों के बड़े-बड़े नेताओंने हुंकार भरे और जीत के दावे किए उसका मतदाताओंमें कितना असर हुआ यह भी चुनाव नतीजों के बाद मालूम पड़ेगा।

उत्तर मुंबई में जहां केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल और कांग्रेस के भुषण पाटिल में टक्कर है तो उत्तर पश्चिम में शिंदे शिवसेना के रवींद्र वायकर और उद्धव सेना के अमोल कीर्तिकर के बीच मुकाबला है। उत्तर मध्य में बाजपा के एड. उज्जवल निकम और कांग्रेस की वर्षा गायकवाड़ के बीच सीधी लड़ाई है। उत्तर-पूर्व मुंबई में भाजपा के मिहिर कोटेचा और उद्धव सेना के संजय पाटिल के बीच आरपार का मुकाबला है। दक्षिण मुंबई की बात की जाए तो यहां उद्धव सेना के अरविंद सावंत और शिंदे सेना की यामिनी जाधब के बीच वर्चस्व की लड़ाई है। जबकि दक्षिण मध्य में शिंदे सेना के राहुल शेवाले और उद्धव सेना के अनिल देसाई के बीच टक्कर हो रही है। मुंबई की ६ सीटों में महायुति के तरफ से ३ पर भाजपा और ३ पर शिंदे सेना लड़ रही है। जबकि महाविकास आघाड़ी की तरफ से ४ सीट पर उद्धव सेना और २ सीट पर कांग्रेस मैदान में है। पिछले चुनाव की बात करे तो भाजपा और संपूर्ण शिवसेना की युति ने सभी ६ सीटों पर कब्जा कीया था, लेकिन इस बार शिवसेना और राष्ट्रवादी में टूट के साथ बने नए समीकरण में मामले को इतना उलझा दिया है, कि राजनिती के जानकार भी नहीं समझ पा रहे है कि मतदाताओंने किसे अपने सहानुभुति दी है और किसके प्रति अपनी नाराजगी जताई है, बहरहाल ४ जून को नतीजे आने के बाद तय हो जायेगा कि कौन कितने पानी में है और मुंबई की जनता किसके साथ है। लेकिन इस बीच सभी दल के कार्यकर्ता अपने नेताओंके पक्ष में दलीले देते हुए उनके विजयी होने की उम्मीद जता रहे है।


