विपक्ष पर साधा निशाना
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली (सं.भा.): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर विशेष चर्चा शुरू की और देशभक्ति के प्रतीक इस गीत के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान युवाओं को प्रेरित किया और देश को आजादी की ओर अग्रसर किया।
पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रेरक मंत्र था। उन्होंने बताया कि जब वंदे मातरम के 50 साल पूरे हुए, तब देश ब्रिटिश राज के अधीन था। 100 साल पूरे होने पर आपातकाल जैसे कठिन दौर में देश भक्ति के लिए जीवन-त्याग करने वाले लोग जेल में थे और संविधान की स्वतंत्रता पर खतरा मंडरा रहा था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी तंज कसा और कहा कि देश के काले अध्याय आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और संविधान को दबाया गया।
पीएम मोदी ने वंदे मातरम की ऐतिहासिक यात्रा को विस्तार से याद करते हुए बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के इस गीत ने अंग्रेजों के लिए चुनौती प्रस्तुत की थी और इसके कारण इसे उस समय प्रतिबंधित करना पड़ा। उन्होंने सरोजिनी बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं ने भी इस आंदोलन में भाग लिया और कई बार व्यक्तिगत बलिदान दिया। छोटे बच्चे भी वंदे मातरम का जाप करते हुए जेल गए, लेकिन देशभक्ति की आवाज कभी नहीं रुकी।
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और वीर सावरकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वंदे मातरम ने लाखों भारतीयों को एक सूत्र में बांधने का काम किया। पीएम ने बताया कि पेरिस में भीकाजी कामा ने इस गीत का प्रचार किया और लंदन स्थित इंडिया हाउस में इसे आजादी का प्रेरक मानते हुए बार-बार गाया गया।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इतिहास के एक मोड़ पर वंदे मातरम को विवादित बनाने का प्रयास भी किया गया। 1937 में मोहम्मद अली जिन्ना के विरोध के बाद कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में इसकी समीक्षा करने का निर्णय लिया। मोदी ने कहा कि यह तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम था, जिससे अंततः देश को विभाजन की ओर भी ले जाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी वंदे मातरम देशभक्ति की भावना का मुख्य स्रोत है। 15 अगस्त, 26 जनवरी और हर घर तिरंगा अभियान में इस गीत की शक्ति और प्रेरणा सभी को दिखाई देती है। उन्होंने सांसदों और सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस गीत के महत्व को समझें, इतिहास को याद रखें और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के अंत में जोर देकर कहा, “वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि देशभक्ति का मंत्र है। हमें गर्व से कहना चाहिए – वंदे मातरम।”


