नई दिल्ली(स भा): बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में सीटों का बंटवारा अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। लगातार कई दौर की चर्चाओं के बाद अब आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच सहमति बनने के संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार तक सीटों का फार्मूला तय कर औपचारिक ऐलान किए जाने की संभावना है।
दिल्ली में सोमवार को पूरे दिन बैठकों का सिलसिला जारी रहा। दिन में पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 10 जनपथ स्थित आवास पर बिहार कांग्रेस नेताओं के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें नेताओं ने अपनी पसंदीदा सीटों की सूची सौंपी। इस चर्चा में राहुल गांधी ने भी संगठन के सुझावों को हरी झंडी दी।
इसके बाद शाम को तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता शकील अहमद और राजेश राम से करीब दो घंटे लंबी बैठक की। बताया जा रहा है कि दोनों दलों के बीच लगभग एक दर्जन सीटों पर मतभेद था, जिनमें से अधिकतर मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।

🔹 वाम दलों के साथ भी बन रही सहमति
महागठबंधन में इस बार वामपंथी दलों की सीटें सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थीं। आरजेडी उन सीटों पर दावा जता रही थी जहाँ पिछली बार कांग्रेस या माले का प्रदर्शन बेहतर रहा था। हालांकि, अब खबर है कि करीब 7 से 8 सीटों पर समझौता फार्मूला तैयार हो गया है।
जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव मंगलवार को वाम दलों, खासकर भाकपा माले को अंतिम प्रस्ताव देंगे, जिसके बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी।
इस बार विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के शामिल होने से महागठबंधन की रणनीति में नया बदलाव आया है।
🔹 पिछले चुनावों के आंकड़े बने मापदंड
पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं कांग्रेस ने 70 सीटों में से 19 पर जीत हासिल की थी। वाम दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था — भाकपा माले ने 19 में से 12 सीटें जीती थीं। इस बार वाम दल अपनी बढ़ी हुई साख के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस का मानना है कि केवल सीटों की संख्या नहीं, बल्कि यह भी अहम है कि कौन-सी सीटों से उम्मीदवार उतारे जाएं, ताकि संगठन की पकड़ मजबूत बनी रहे।
🔹 मंगलवार को साफ होगी तस्वीर
सूत्रों के मुताबिक अब सभी दलों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है और मंगलवार तक सीटों का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।
पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर है, ऐसे में महागठबंधन के उम्मीदवारों की सूची तय होते ही चुनावी रणनीति भी तेज़ हो जाएगी।


